सोनिया गांधी ने गडकरी का प्रस्ताव ठुकराया


नई दिल्ली। भूमि अधिग्रहण विधेयक के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का प्रस्ताव ठुकरा दिया था और उसे मजाक ठहराया है। भूमि अधिग्रहण विधेयक के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी आमने-सामने आ गए हैं। विधेयक के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता नितिन गडकरी ने उन पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार की नीतियों के चलते ही बेरोजगारी और किसानों की खुदकुशी के मामले बढ़े। राजग सरकार के विवादास्पद विधेयक पर अहम भूमिका निभा रहे गडकरी ने सोनिया के एक पत्र का जवाब देते हुए कहा कि यूपीए सरकार द्वारा सिंचाई और अन्य ग्रामीण तथा सामाजिक बुनियादी परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण कानून के तहत एक भी एकड़ जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया और किसान हर बार बारिश पर निर्भर रहे। गडकरी को लिखे पत्र में सोनिया ने बातचीत कर गडकरी का प्रस्ताव ठुकरा दिया था और कहा था कि यह मजाक है और भाजपा सरकार ने एकपक्षीय तरीके से भूमि अध्यादेश लागू किया। विधेयक को किसान विरोधी बताते हुए सोनिया ने आरोप लगाया था कि सरकार उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए पूरी तरह नतमस्तक हो रही है। सामाजिक प्रभाव आकलन के दायरे से बाहर जाकर अनेक परियोजनाओं को चालू रखने संबंधी आलोचनाओं का जवाब देते हुए गडकरी ने कहा कि संप्रग सरकार ने जानबूझकर एक व्यवस्था बनाई, जिसमें बड़ी भूमि अधिग्रहण परियोजनाएं आकलन के बाहर थीं जबकि राज्य सरकार द्वारा संचालित कल्याण परियोजनाएं इसमें फंसी हुई थीं। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि आपके भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जिन सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों को कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए थे वे सामाजिक प्रभाव आकलन के बिना हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर सकते हैं, लेकिन अगर राज्यों को किसी स्कूल या अस्पताल या ग्रामीण सड़क के लिए एक एकड़ भी जमीन चाहिए तो उन्हें इस जटिल कवायद से गुजरना होता है। उन्होंने कहा कि क्या यह उचित होगा महाराष्ट्र के आपकी पार्टी के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मांग की थी कि इस तरह के विधेयक का अध्ययन मुख्यमंत्रियों के समूह द्वारा कराया जाना चाहिए, लेकिन संप्रग ने अपने ही मुख्यमंत्रियों के बीच आम-सहमति बनाना उचित नहीं समझा।