सार्इंबाबा पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस


मुम्बई । सुप्रीम कोर्ट ने ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के प्रोपेâसर जी.एन.सार्इंबाबा की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है । सार्इंबाबा पर प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से कथित तौर पर संबद्ध संगठन रिवोल्यूशनरी डेमोव्रेâट्स प्रंâट के साथ संबंध रखने के आरोपों के तहत मई २०१५ में महाराष्ट्र पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। उन्होंने बंबई उच्च न्यायालय (नागपुर पीठ) द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के २३ दिसंबर, २०१५ के आदेश को चुनौती दी थी।
न्यायर्मूित जगदीश िंसह केहर तथा न्यायर्मूित सी.नागप्पन की सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने लेखिका व सामाजिक कार्यकर्ता अरुं धती रॉय की अदालत की अवमानना को चुनौती देने वाली याचिका पर भी नोटिस जारी किया।
नोटिस का जवाब दो सप्ताह में देने का निर्देश देते हुए न्यायालय ने अरुं धती द्वारा न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट की मांग करने वाली याचिका को स्वीकार नहीं किया।
एक अंग्रेजी पत्रिका में उन्होंने लिखा था, ठएक लकवाग्रस्त और व्हील चेयर पर चलने वाले प्रोपेâसर से सरकार इतना डर गई है कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए महाराष्ट्र पुलिस को उनका अपहरण करना पड़ा।ठ रॉय की इस टिप्पणी पर उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला दायर किया गया था। अधिवक्ता भंडारकर ने रॉय की टिप्पणी को न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए अदालत में याचिका दाखिल की थी, जिसपर उन्हें नोटिस जारी किया गया।
सार्इंबाबा को स्वास्थ्य के आधार पर बंबई उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया। पोलियो के बाद लकवा के कारण वे ९० फीसदी विकलांग हैं।
अंतरिम जमानत को ३१ दिसंबर तक बढ़ाते हुए उच्च न्यायालय ने नियमित जमानत के लिए उच्च न्यायालय की नागपुर की पीठ के पास जाने के लिए कहा था। मामले में एक अन्य आरोपी पहले से ही जमानत पर है।