सशक्तिकरण पर भारत में नई क्रांति की शुरुआत : पीएम मोदी


०१०३वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस में ‘मेक इन इंडिया’ वैश्विकरण पर मंथन
मैसूर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर्नाटक दौरे के दूसरे दिन मैसूर में १०३वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि देश और दुनिया में विज्ञान की अगुवाई करने वाली शाqख्सयतों के साथ साल की शुरुआत करना र्हािदक प्रसन्नता की बात है। भारत में हमने सशक्तिकरण और अवसरों की एक नई क्रांति की शुरुआत की है। र्आिथक विकास और मानव कल्याण के मकसदों को हासिल करने के लिए हम वैज्ञानिकों और प्रवर्तकों की तरफ उम्मीद की ऩजरों से देख रहे हैं। इस बार भारतीय विज्ञान कांग्रेस की थीम, डॉ कलाम के वि़जन को सलाम करने के लिए एकदम उपयुक्त है। हमारी सफलता एक छोटे से एटम से लेकर अंतरिक्ष की ऊंचाईयों तक पहुंच चुकी है। हमने खाद्य और स्वास्थ्य सेवाओं में इ़जाफा किया है और हम दुनिया के बाकी देशों के लिए एक बेहतर िं़जदगी की प्रेरणा बनते जा रहे हैं।
इस समारोह का आयोजन मैसूर द्वारा ३४ साल बाद ऐसे वक्त में किया गया है, जब मैसूर यूनिर्विसटी अपनी स्थापना का १००वां साल मना रही है। इस बार की थीम भारत में स्वदेशी विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में मशहूर वैज्ञानिकों सहित ५०० से ़ज्यादा गणमान्य नागरिक शिरकत कर रहे हैं। देशभर के जानेमाने वैज्ञानिक और तकनीकविद रविवार को मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को वैश्विक बाजार में लागू करने के विचार मंथन पर मैसूर में एकत्रित हुए हैं इस बारे में मैसूर विश्वविद्यालय के कुलपति के.एस. रंगरप्पा ने बताया, कि १०३वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस का थीम प्रधानमंत्री के प्रमुख कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है ताकि वैश्विक निवेश को बढ़ावा मिले, नई नौकरियों का सृजन हो तथा निर्यात में बढ़ोतरी हो। विज्ञान कांग्रेस का आयोजन मैसूर विश्वविद्यालय के वृहद मंसागंगोत्री परिसर में किया गया है। इस पांच दिवसीय आयोजन में नोबेल पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिकों के अलावा हजारों छात्र भी भाग ले रहे हैं।
कर्नाटक में अब तक १० बार विज्ञान कांग्रेस का आयोजन हो चुका है, जिसमें मैसूर में यह दूसरी बार हो रहा है। ८ बार इस कार्यक्रम का आयोजन बेंगलुरू में किया गया है। दिलचस्प बात ये है कि पहली विज्ञान कांग्रेस का आयोजन भी मैसूर में ही १९१७ में किया गया था। उस वक्त मैसूर के महाराजा नलवाडी कृष्णराजा वडियार ने भारतीय विज्ञान संस्थान परिसर में इसका उद्घाटन किया था। उन्होंने इस संस्थान के लिए १९११ में ३७१ एकड़ जमीन दान में दी थी। रविवार को उद्घाटन सत्र के बाद प्रमुख वैज्ञानिक व भारत रत्न सी.एन.आर. राव भारत में विज्ञान विषय पर व्याख्यान दिया।
विज्ञान कांग्रेस में साइंस एंड टेक्नॉलजी : अतीत और भविष्य विषय पर पांच नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक परिचर्चा करेंगे। जिसमें जॉन बी गर्डन (ब्रिटेन), डास सेचमैन (इजरायल), डेविड जे ग्रास और आर्थर बी मैकडोनाल्ड (अमेरिका) तथा सर्ज हेरोसे (प्रâांस)। इनके अलावा इस कार्यक्रम में भारतीय मूल के प्रिसटन विश्वविद्यालय, अमेरिका के वैज्ञानिक मंजूल भार्गव भी भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी इस कार्यक्रम में ३० जाने-माने वैज्ञानिकों को सम्मानित करेंगे।