संघ ने बिहार में भाजपा को सीएम कैंडिडेट नही बनाने दी नसीहत


पटना। दिल्ली की चुनावी हार से सबक लेते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भाजपा से कहा है कि बिहार में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में किसी को पेश नहीं करना चाहिए। लखनऊ में आरएसएस और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच इस हफ्ते हुई मीिंटग में आरएसएस नेताओं ने कहा कि बिहार से मिलने वाली शुरुआती रिपोट्र्स इशारा करती हैं कि मुख्यमंत्री पद के लिए किसी एक चेहरे को सामने रखना ठीक नहीं होगा। इस बैठक में आरएसएस के सरकार्यवाह सुरेश जोशी ‘भैयाजी’ और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी मौजूद थे।
० लीडरशिप का संकट
भाजपा के शीर्ष सूत्र ने बताया, कि आरएसएस ने बिहार से अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की कुछ रिपोट्र्स में कुछ गंभीर मुद्दों को उठाया है। सूत्र ने बताया, कि लोकसभा चुनावों में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार अलग-अलग चुनाव लड़े थे, लेकिन इस बार वे साथ हैं और जातियों का गुणा-गणित उनके पक्ष में है। सूत्र ने बताया, कि भाजपा की बिहार इकाई में नेतृत्व का गंभीर संकट है। सुशील मोदी दूसरे नेताओं की तरह लोकप्रिय नहीं हैं। भाजपा-जेडी(यू) शासनकाल के दौरान गिरिराज िंसह ने मोदीजी को वैंâपेन की अनुमति न देने का बड़े जोर-शोर से विरोध किया था और मूकदर्शक बने रहने पर सुशील मोदी के खिलाफ बगावती रुख भी अपनाया था।
० जातिगत पेच
जातिगत आधार पर भी किसी नेता को पेश करने को लेकर कई मुद्दे हैं। अगर राज्य विधानसभा के दो प्रमुख नेताओं सुशील मोदी या नंद किशोर यादव को अन्य पिछड़ा वर्ग के चेहरे के रूप में पेश किया जाता है तो कथित ऊंची जातियों का समर्थन शायद इतनी मजबूती से न मिले सूत्रो ने बताया कि ऊंची जातियों के लोग पार्टी को तब भी वोट कर सकते हैं, लेकिन जिस तरीके से वे वोटरों को संगठित करते आए हैं, वैसा नहीं होगा। यह महाराष्ट्र या हरियाणा की तरह का मामला नहीं है, जहां गैर-मराठा और गैर जाट को चीफ मिनिस्टर बनाया जा सकता है।
० महादलितों पर नजर
बताया गया है कि पहले से चीफ मिनिस्टर वैंâडिडेट पेश किए जाने की ाqस्थति में ‘दिल्ली जैसी ाqस्थति खड़ी हो सकती है, जिसमें संगठन के कार्यकर्ता घरों में ही रहे और पार्टी चुनाव हार जाये। बिहार में पिछड़ी जातियों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए आरएसएस ने ‘एक कुआं, एक मंदिर, एक श्मशान’ वैंâपेन पर भी काम करना शुरू किया है। बिहार में नीतीश कुमार के महादलित बेस का आधार बिगाड़ने के लिए एनडीए के सहयोगी रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा के अलावा जीतन राम मांझी की पार्टी को भी अच्छी संख्या में सीटें दी जा सकती हैं।