व्यापम घोटाले की काली कोठरी में सभी दागदार


– व्यापम घोटाले की जांच : पूरी दाल ही काली!
भोपाल। अरबों रुपयों के व्यापमं घोटाले की काली कोठरी में जांच में जिनकी भूमिका है। उन सभी पर कहीं ना कहीं दाग लग रहे हैं। जैसे-जैसे घोटाले की जांच हनुमानजी की पूंछ की तरह बढ़ रही है। उसकी आग से अब जांच करने की जिम्मेदारी रखने वाले पक्ष भी झुलस रहे हैं। निरपराध छात्र-छात्राओं और परीक्षार्थी कई माहों से जेल में बंद हैं। उन्हें नौकरी अथवा प्रवेश भी नहीं मिला। पैसा गया सो अलग। भ्रष्टाचारी व्यवस्था के रूप में ब्याज में ही जेल मिली और महीनों बाद जमानत भी नहीं हो रही है। हजारों युवाओं का पूरा केरियर ही बर्बाद हो गया विंâतु इस घोटाले की आग कब ठंडी होगी। कब न्याय मिलेगा इसको लेकर जेल में बंद छात्र-छात्राओं, उनके परिवारजनों तथा जेल में बंद नेताओं को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा। फिलहाल व्यापमं घोटाले की जांच की पूरी दाल ही काली नजर आ रही है।
म.प्र. का व्यापमं घोटाला देश का सबसे बड़ा अरबों रुपयों का डिजिटल घोटाला है। व्यवसायिक परीक्षा मंडल ने जिस तरह पीएमटी तथा व्यवसायिक प्रवेश परीक्षा में कम्प्यूटर के रिकार्ड में गड़बड़ी कर अरबों रूपयों की अवैध कमाई भ्रष्ट अधिकारियों तथा राजनेताओं ने की है। उसकी रकम अभी तक जांच एजेंसी एसटीएफ जब्त नहीं कर पाई।
– एसटीएफ की कार्यप्रणाली पर संदेह
एसटीएफ ने पीएमटी प्रवेश परीक्षा के घोटाले से इसकी जांच शुरू की थी। परीक्षा नियंत्रक के कम्प्यूटर तथा हार्ड-डिस्क के डाटा से इस प्रकरण में हुई गड़बड़ियों की परत एक के बाद एक प्याज की परतों की तरह खुलना शुरू हुई। कम्प्यूटर तथा हार्ड डिस्क से एसटीएफ ने कम्प्यूटर विशेषज्ञ प्रशांत पांडे की मदद से सारी जानकारी जुटाई थी। इस जानकारी के अनुसार एसटीएफ ने कुछ अधिकारियो तथा जिम्मेदार नेताओं को जेल भेजा। वहीं कुछ लोगों को बचाने का प्रयास भी किया। एसटीएफ की जांच और कार्यवाही की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस एवं अन्य याचिकाकर्ताओं ने सरकार और हाईकोर्ट से सीबीआई जांच की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि एसटीएफ उच्च पदस्थ लोगों को बचाने का काम कर रही है। वहीं इस घोटाले के सूत्र कई राज्यों में पैâले हैं। अतः सीबीआई से जांच कराने के आदेश दिये जाएं।
– हाईकोर्ट की निगरानी में जांच
हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग करने वाली सभी याचिकाओं का निराकरण करते हुए सीबीआई जांच की मांग ढुकरा दी थी। हाईकोर्ट ने अपने सुपरविजन में एसटीएफ द्वारा जांच करने की व्यवस्था दी थी। व्यापम घोटाले में एसटीएफ को निर्देश हाईकोर्ट द्वारा दिया जा रहा है। एसटीएफ की कार्यवाही पर लगातार प्रश्न चिन्ह लगने पर हाईकोर्ट ने एसआईटी का गठन कर जांच का जिम्मा सेवा निवृत हाईकोर्ट के न्यायाधीश चंद्रेश भूषण को दिया। म.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तथा दिल्ली हाईकोर्ट में कम्प्यूटर विशेषज्ञ प्रशांत पांडे की याचिका के बाद न्यायालयीन सुपरवीजन पर भी सवाल उठने लगे हैं। इससे एसआईटी तथा हाईकोर्ट के निर्णय पर अब देश भर में चर्चाएं होने लगी हैं।
– दिल्ली एवं म.प्र. हाईकोर्ट के पैâसलों पर अटकलें
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रशांत पांडे की याचिका को स्वीकार करते हुए म.प्र. शासन और एसटीएफ को आदेश दिया था कि याचिकाकर्ता को यदि पूछताछ अथवा रिकार्ड से संबंधित जानकारी की जरूरत हो। इस स्थिति में दिल्ली हाईकोर्ट से अनुमति लेकर उससे अथवा याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की उपस्थिति में मप्र पुलिस (एसटीएफ) पूछताछ करेगी। म.प्र. शासन को याचिकाकर्ता की सुरक्षा के लिए भी दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे।
– म.प्र. हाईकोर्ट के निर्देश
व्यापम घोटाले की जांच कर रही एसटीएफ ने हाईकोर्ट में बंद लिफापेâ में अपनी जांच से संबंधित जानकारी दी थी। इसमें म.प्र. के राज्यपाल सहित उच्च पदों पर बैठे लोगों के नाम भी थे। म.प्र. हाईकोर्ट ने संदिग्ध लोगों पर एफआईआर दर्ज कर जांच करने के निर्देश एसटीएफ को निर्देश दिए।
– राज्यपाल और उनके बेटों पर एफआईआर
म.प्र. हाईकोर्ट के निर्देश पर एसटीएफ ने राज्यपाल रामनरेश यादव सहित कई प्रभावशाली लोगों पर अपराध पंजीबद्ध कर लिया। अपराध पंजीबद्ध होने के बाद गृह मंत्रालय ने राज्यपाल को इस्तीफा देने की सलाह दी। राज्यपाल ने दिल्ली जाकर राष्ट्रपति और गृह मंत्री से मिलकर अपनी बात रखने के लिए समय मांगा, जो उन्हें नहीं मिला। राज्यपाल दिल्ली से भोपाल आ गए और एसटीएफ ने उनसे अभी तक पूछताछ भी नहीं की।
राज्यपाल रामनरेश यादव ने अब एफआईआर निरस्त करने मप्र हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। जिसकी पैरवी करने वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी जबलपुर पहुंचे हैं।
– दिल्ली जाकर जांच करने से रोका एसटीएफ को
म.प्र. हाईकोर्ट ने एसटीएफ को दिल्ली जाकर पूछताछ करने से एसटीएफ को रोक दिया। हाईकोर्ट ने एसआईटी के निर्देश पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि एसआईटी जांच एजेंसी नहीं है। इससे व्यापम का मामला एक बार फिर कानूनी दांव पेंच के मकड़जाल में उलझ गया। विधि के जानकारों की माने तो एसआईटी की नियुक्ति म.प्र. हाईकोर्ट ने एसटीएफ की जांच प्रक्रिया में निगरानी करने तथा जांच के लिए आवश्यक मार्गदर्शन देने के लिए की थी अब हाईकोर्ट ने एसआईटी के पर कतर दिये हैं। जिसकी बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
– एसआईटी का रोल चर्चाओं में
म.प्र. हाईकोर्ट के उक्त निर्णय के बाद एसआईटी के औचित्य पर सवाल खड़े हो गए। एसटीएफ के अधिकारियों की समझ नहीं आ रहा है कि वह एसआईटी दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर किस तरह कार्रवाई करे।
– दिल्ली हाईकोर्ट
व्यापम घोटाले की जांच में विपक्ष ने एसआईटी में जो मामले दर्ज जो कराकर दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। उनकी जांच के लिए एसटीएफ को दिल्ली जाकर प्रशांत पांडे से दस्तावेजों की सत्यता को लेकर जांच एवं पूछताछ करनी थी। यदि एसटीएफ दिल्ली नहीं जाएगी तो व्यापम घोटाले की जांच को आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा। इस स्थिति में मप्र हाईकोर्ट के १५ मार्च तक व्यापम घोटाले की जांच तथा आरोपियों की गिरफ्तारी पर अमल किस तरह होगा।
– व्यापम की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में
पिछले एक साल से व्यापम की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में एसटीएफ कर रही है। विपक्ष द्वारा व्यापम घोटाले के दस्तावेज एसटीएफ तथा एसआईटी को देकर जांच करने की मांग की जा रही है। मीडिया में आए दिन नये नये खुलासे कर विपक्ष आरोप लगा रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट में व्यापम घोटाले का सत्य उजागर करने वाला महत्वपूर्ण व्यक्ति प्रशांत पांडे सुरक्षा की मांग करने दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचने से प्रदेश की न्यायिक एवं पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। इससे म.प्र. हाईकोर्ट, एसआईटी, एसटीएफ जांच और कार्यवाही को लेकर सारे देश में चर्चाएं हो रही हैं।
– व्यापम का असर सरकार के कामकाज में
देश के इतिहास में व्यापम घोटाले का असर प्रदेश के संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों पर एक साथ सवालिया निशान लगने का यह पहला मौका है। राज्यपाल रामनरेश यादव के खिलाफ एसटीएफ ने एफआईआर दर्ज कर की है। विपक्ष विधानसभा के अंदर और बाहर मुख्यमंत्री और उनके परिवारजनों पर व्यापम घोटाले में लिप्त होने का आरोप लगा रहा है। विधानसभा का ४७ दिवसीय बजट सत्र मात्र ७ बैठकों में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। विधानसभा की कार्यसूची में बजट प्रस्ताव नहीं होने के बाद भी २०१५-२०१६ का बजट हंगामे के बीच पारित होने से विधानसभा अध्यक्ष पर भी विपक्ष ने निशाना साध लिया है। म.प्र. में पहली बार संवैधानिक पदों पर बैठे मुख्यमंत्री, राज्यपाल तथा विधानसभा अध्यक्ष व्यापम घोटाले की आंच में झुलसे हुए हैं।
– डेढ़ साल से बंद है छात्र-छात्राएं
व्यापम घोटाले में एसटीएफ ने पहली गिरफ्तारी ७ जुलाई २०१३ को थी। उसके बाद से लगातार गिरफ्तारियां हो रही हैं। अभी तक गिरफ्तार आरोपियों को जमानत नहीं मिली। छात्र-छात्राओं के परिवारजन भी लंबे समय से जेल में बंद है। व्यापम घोटाले में आरोपियों को इतने लंबे समय तक जेल में रहने के कारण न्यायिक व्यवस्था पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। कुख्यात हत्यारों को भी इतने लंबे समय तक चालान पेश नहीं होने पर जमानत मिल जाती है विंâतु व्यापम घोटाले की गिरफ्तारी में छात्र-छात्राओं तथा उनके परिवारजनों को सालों से गिरफ्तार कर उनकी स्वतंत्रता तथा केरियर को लेकर अब आमजनों के बीच चर्चाएं हो रही हैं।
घोटाले की रकम कहां-
एसटीएफ ने पीएमटी घोटाले तथा लगभग डेढ़ दर्जन परीक्षाओं में प्रति परीक्षार्थी लाखों रुपयों का लेन-देन हुआ था। एसटीएफ ने गिरफ्तारियां तो कर लीं, किन्तु रकम को बरामद करने का कोई प्रयास नहीं किया। चूंकि मप्र हाईकोर्ट की निगरानी में जांच हो रही है। इस स्थिति में एसटीएफ की कार्यवाही पर टिप्पमी करना मुश्किल है। विधि विशेषज्ञों की राय के अनुसार रिश्वत और घोटाले की रकम आरोपियों से जब्त नहीं करने पर आरोप सिद्ध कर पाना एसटीएफ के लिए न्यायालय में मुश्किल होगा। इस प्रकरण में रिश्वत देने वाला तथा पाने वाले दोनों अपराधी हैं। अतः न्यायालय में बचने के लिए दोनों पक्ष आपस में मिल जाएंगे। वहीं एसटीएफ ने कम्प्यूटर तथा हार्डडिस्क से जो दस्तावेजी सबूत जुटाये थे उसका मुख्य किरदार प्रशान्त पांडे का दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका में दायर कर रिकार्ड में हेरापेâरी करने का आरोप लगाते हुए अपनी सुरक्षा की मांग दिल्ली हाईकोर्ट से की है। यही आरोप विपक्ष भी लगा रहा है। इस स्थिति में एसटीएफ द्वारा डिजिटल डाटा की हेरापेâरी से उसकी प्रमाणिकता पर सवालिया निशान लग रहे हैं। इसके बाद आरोप प्रमाणित कर पाना एसटीएफ के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
-बड़ी मछलियों को बचाने में सबकी इज्जत दांव पर
व्यापमं महाघोटाले की जांच में डिजिटल डाटा के माध्यम से जो दस्तावेज तथा रिकार्ड प्रारंभिक जांच में एसटीएफ को मिला था। उसकी जब्ती और जांच को लेकर कम्प्यूटर विशेषज्ञ प्रशांत पांडे ने जान बूझकर गड़बड़ी के आरोप एसटीएफ पर लगाये हैं। जिस प्रकरण में उसने पुलिस की मदद की थी। उसी पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर धमकाने तथा निगरानी का आरोप है। कई राज्यों में घोटाले के आरोपी पैâले हुए हैं। राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी निशाने पर हैं। इस स्थिति में व्यापमं घोटाले की जांच और कार्यवाही से जुड़े सभी पक्षों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
छात्र-छात्राओं की जमानत परीक्षाओं में गड़बड़ी कराकर प्रवेश तथा सरकारी नौकरी पाने की चाह में जिन युवा युवतियों को कई माहों से जेल में बंद रखा गया है। उनकी जमानत लंबे समय तक नहीं होने से अब उनको लेकर भी सहानुभूति होने लगी है। वहीं बड़ी मछलियों पर कार्यवाही ना होने से अब व्यापमं घोटाले की जांच पर विश्वसनीयता का संकट खड़ा हो गया है।
बदले की कार्यवाही ने पकड़ा तूल-
मप्र विधानसभा सचिवालय ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तथा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी पर अवैध नियुक्तियों को लेकर अपराधिक मुकदमा दर्ज करा दिया।
इसके बाद कांग्रेस ने भी पिछले १० वर्षो में हुई अवैध नियुक्तियों की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराकर कार्यवाही की मांग कर दी। पक्ष एवं विपक्ष के बदले की कार्यवाही को लेकर, पुलिस,एसटीएफ, विधानसभा सचिवालय, राजभवन, सरकार सभी दबाव में हैं। अधिकारियों की समझ नहीं आ रहा है कि वह किस तरह कार्यवाही करें।
विधानसभा का विशेष सत्र
व्यापम घोटाले को लेकर चल रहे हंगामे के बीच सरकार ने जल्दबाजी में सदन की बैठवेंâ अनिश्चिकाल के लिए स्थगित करा दी। बाद में पता चला कि अनुपूरक बजट पास कराना भूल गये। अब सरकार विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। व्यापमं घोटाले के भूत से सभी पक्ष हैरान परेशान है। अभी तक इसका सही उपचार नहीं हो पा रहा है अब झाड़ पूंâक की संभावना भी खोजकर व्यापमं के भूत को भगाने की तैयारियां हो रही हैं।