विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ‘जिका’ से निपटने बुलाई आपात बैठक


जिनेवा । तेजी से पैâल रहे खतरनाक जिका वायरस के मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यू एच ओ) प्रमुख मार्गरेट चान ने गुरुवार को कहा कि जन्म के समय होने वाले विकारों में तेजी से बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार कहा जा रहा `जिका’ वायरस उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में भयावह ढंग से पैâल रहा है। मार्गरेट ने इस मामले पर आगामी एक फरवरी को आपात बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा, `जिका अब भयावह ढंग से पैâल रहा है। अलार्म का स्तर बहुत अधिक है।’ चान ने कहा कि डब्ल्यूएचओ की आपात समिति आगामी सोमवार को बैठक कर यह देखेगी कि क्या जिका वायरस ने अंतरराष्ट्रीय लोक स्वास्थ्य आपात ाqस्थति पैदा कर दी है। उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के लिये डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय कार्यालय में संचारी रोग एवं स्वास्थ्य विश्लेषक के प्रमुख मारकोस एाqस्पनाल ने कहा कि जिका के ३० से ४० लाख मामले हो सकते हैं। जिका वायरस सबसे पहले १९४७ में उगांडा के जंगलों में एक बंदर में मिला था। इसके बाद से कभी-कभी इसके मामले इंसानों में भी देखे गए हैं।

जिका वायरसः वेनेजुएला में ४,७०० और प्रâांस में पांच संदिग्ध
पेरिस । लातिन अमेरिका और ब्राजील के बाद वेनेजुएला में भी जिका विषाणु के ४,७०० संदिग्ध पाए गए हैं, वहीं प्रâांस की सरकार ने भी विदेश यात्रा से लौटे पांच लोगों में जिका के संक्रमण की बात स्वीकारी है। गौर हो कि लातिन अमेरिका में हजारों ऐसे अन्य संदिग्ध मामले पाए गए हैं, जिसके कारण मच्छरजनित विषाणु से निपटने में स्वास्थ्य क्षेत्र की खामी उजागर हो गई है। वेनेजुएला के स्वास्थ्य मंत्री लुइसाना मेलो ने गुरुवार को कहा, हमारे पास ४,७०० मरीजों के जिका विषाणु से संक्रमित होने की आशंका से जुड़ी खबरें हैं। ऐसा उनमें दिखने वाले लक्षणों के आधार पर कहा जा रहा है।
यह पहली बार है जब तीन करोड़ की आबादी वाले इस दक्षिण अमेरिकी देश की सरकार ने संदिग्ध संक्रमित लोगों की संख्या जारी की है। यह देश र्आिथक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। वहीं, प्रâांस की सरकार ने अपने यहां पांच मामलों की जानकारी देते हुए कहा है कि जिन पांच लोगों में विदेश यात्रा के दौरान जिका विषाणु पाया गया था, वे साल की शुरूआत में ही प्रâांस लौट आए हैं। प्रâांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, किसी भी मरीज की हालत गंभीर नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गुरुवार को कहा कि अमेरिकी महाद्वीपों में जिका बहुत तेजी से पैâल रहा है और क्षेत्र में मामलों की संख्या ४० लाख तक जा सकती है। वेनेजुएला उन २० देशों में शामिल है, जिनमें जिका के मामले सामने आए हैं।

नड्डा ने जीका वायरस पर उच्च स्तरीय बैठक की
नई दिल्ली । केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने आज कुछ देशों से पैâले जीका वायरस पर ाqस्थति की समीक्षा करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय तथा एम्स के अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हम ाqस्थति पर निगरानी रखे हुए हैं और आपात ाqस्थति से निपटने के लिए भारत की तैयारी सुनिाqश्चत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने तत्काल प्रभाव से एक तकनीकी समूह गठित करने का निर्देश दिया। यह समूह अन्य देशों में जीका वायरस के पैâलने से उत्पन्न ाqस्थति पर नजर रखेगा और आवश्यक रूप से उठाए जाने वाले कदमों के बारे में सलाह देगा।
डेंगू प्रकोप वाले एडीज मच्छर भी जीका वायरस का संचार करते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि स्वच्छ पानी में उत्पन्न होने वाले एडीज मच्छरों के पैâलाव को नियंत्रित करने के लिए विशेष जोर दिया जाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस दिशा में सामुदायिक जागरुकता महत्वपूर्ण है। समुदायों के बीच अधिक से अधिक जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता है। बैठक में स्वास्थ्य सचिव बी. पी. शर्मा, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. जगदीश प्रसाद तथा स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपाqस्थत थे।

अलर्टः भारत में भी जिका वायरस का खतरा
नई दिल्ली । २२ अमेरिकी देशों और ब्राजील के बाद खतरनाक जिका वायरस की नजर अब भारत पर है। हजारों गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर हमला करने वाला जिका वायरस भारत के लिए भी खतरनाक हो सकता है। वेंâद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने सेंटर फॉर कम्यूनिकेबल डिसीज (सीडीसी) को पत्र लिख कर जिका वायरस से संक्रमित मरीज की जांच करने संबंधी टेिंस्टग किट की मांग की है। इसके अलावा सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यू एच ओ) से भी आग्रह किया है कि जिका वायरस से संबंधित गाइड लाइंस, इलाज और बचाव के लिए भारत के लिहाज से सहायता करे। यह संस्थान जो संक्रामक रोगों पर अनुसंधान करता है, वह भी जिका वायरस के अणुओं की जांच उन लोगों पर करने को तैयार है जो संभावित तौर पर इस वायरस की चपेट में हों।
भारत में मच्छरों की भरमार है। यहां भी मादा एडीज मच्छरों से मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसे खतरनाक रोगों की महामारी पैâल चुकी है। जबकि जिका वायरस भी एडीज मच्छर से ही पैâलता है। इसी को देखते हुए विशेषज्ञ ये आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि यहां भी जिका वायरस अपना कहर बरपा सकता है। हालांकि सरकार उन लोगों की विशेष निगरानी कर रही है जो ऐसे देशों से भ्रमण कर के आ रहे हैं जहां जिका वायरस का प्रकोप पैâला हुआ है।

जीका वायरस से लड़ने को तैयार है भारत
नई दिल्ली ।  उत्तर और दक्षिण अमरीका में महामारी की शक्ल आqख्तयार कर रहे ़जीका वायरस से निपटने के लिए भारत ने बड़े पैमाने पर इंत़जाम प्रारम्भ कर दिए हैं। भारतीय वेंâद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ़जीका वायरस का पता लगाने के लिए परीक्षण किट प्राप्त करने की प्रक्रिया में है। हालांकि अभी भारत में इस वायरस के नमूने नहीं मिले हैं फिर भी एहतियातन इस वायरस से लड़ने के लिए जांच हेतू परीक्षण किट तैयार की जा रही है।
़जीका वायरस की अधिक जानकारी के लिए सरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन के रोग नियंत्रण वेंâद्र (सीडीसी) के संपर्वâ में है जिससे कि इस संक्रमण से बचाव के लिए हरसंभव प्रयास किये जा सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि ये वायरस दक्षिण और उत्तर अमरीकी महाद्वीपों के लगभग सभी क्षेत्रों में पैâल सकता है। वायरस अब तक २१ वैâरेबियाई, उत्तर और दक्षिण अमेरिकी देशों में पैâल चुका है। ब्रा़जील में अबतक लगभग ४००० बच्चे इस वायरस के संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं और लगभग ४० बच्चों की मौत भी हो चुकी है।
़जीका वायरस एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इस वायरस से माइक्रोसीफली नामक बीमारी होती है जिससे सिर में असामान्य छोटापन और माqस्तष्क का जन्मजात अधूरा विकास होता है। ़जीका वायरस की पहचान पहली बार १९४७ में युगांडा में हुई थी। इसका पहला मामला १९५४ में नाइजीरिया में सामने आया था। इस वायरस से पीड़ित गर्भवती महिलाओं से जन्म लेने वाले शिशुओं के माqस्तष्क का पूरी तरह से विकास नहीं हो पाता। इस संक्रमण के लक्षणों में बु़खार होना, कनजांqक्टवाइटिस, सिरदर्द, आंखे लाल होना, बैचेनी, जोड़ो में दर्द होना शामिल हैं। इस वायरस का सबसे घातक पहलू यह है कि पांच में से सिर्पâ एक मरीज को ही संक्रमण के बारे में पता चल पाता है यानि लगभग ८० प्रतिशत लोगों में किसी भी खास प्रकार के लक्षण पैदा नहीं होते, जिसकी वजह से गर्भवती महिलाओं के लिए यह जानना कठिन होता है कि वे इस वायरस से संक्रमित हैं या नहीं।