विधानसभा के गर्भ गृह में सारी रात विधायकों का धरना


– मांग पूरी होने तक नहीं खत्म होगा धरना
– सोती हुई कांग्रेस आर-पार की लड़ाई लड़ने की मुद्रा में
– ० फीसदी ऋण पर १५ फीसदी ब्याज पर दंड ब्याज
भोपाल । म.प्र. विधानसभा के एक दिवसीय सत्र में प्राकृतिक आपदा में हुए किसानों के नुकसान को राहत पहुंचाने के लिए कांग्रेस के विधायक बैठक स्थगित होते ही गर्भ गृृह में धरने पर बैठे हैं। नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ने कहा कि सदन में चर्चा हुई, किन्तु मुख्यमंत्री ने हमेशा की तरह घोषणायें तो बड़ी-बड़ी कर दीं, किन्तु उनमें अमल कब और वैâसे होगा, इसको लेकर सरकार ने चुप्पी साध ली है।
उन्होंने कहा कि हमने सदन में चर्चा के दौरान जो मांग की थी, सरकार ने उन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। पिछले ३ वर्षों से प्राकृतिक आपदा के कारण किसान आर्थिक रूप से टूट चुका है। सहकारी बैंक, बिजली वंâपनियां किसानों की कुर्की कर रही हैं। उनके मवेशी, कृषि संयत्र तथा फर्नीचर उठाकर ले जा रही है। पिछले वर्ष का मुआवजा अभी नहीं बंटा है। कई स्थानों पर हताश किसानों ने आत्महत्या कर ली। सरकार मानसिक बीमारी तथा पारिवारिक कलह बताकर पल्ला झाड़ रही है।
नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे, वरिष्ठ विधायक मुकेश नायक, जीतू पटवारी, बाला बच्चन, रजनीश हरवंश सिंह, निशंक जैन ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि सरकार बड़ी-बड़ी घोषणायें करती है, उन पर अमल नहीं करती है। मुआवजा वितरण पर भारी रिश्वतखोरी तथा भ्रष्टाचार है। पिछले ३ वर्षों से किसान परेशान है। वहीं बिजली वंâपनी तथा सहकारी बैंक डिफाल्टर किसानों पर १५ फीसदी की दर से ब्जाज और ब्याज पर ब्याज लगाकर किसानों से हजारों रूपये के कर्ज की लाखों रूपया वसूली कर रहे हैं।
कांग्रेस विधायकों ने कहा कि उनका धरना तब तक खत्म नहीं होगा जब तक सरकार किसानों को राहत निश्चित समय सीमा पर देने, ब्याज, कर्ज तथा बिजली बिलों की काफी का लिखित आश्वासन नहीं देती है, तब तक कांग्रेस विधायक सदन से नहीं उठेंगे।
शाम ४ बजे नेता प्रतिपक्ष विधानसभा परिसर के बाहर आकर अगली रणनीति की घोषणा करेंगे।

– मुख्यमंत्री की सदन में घोषणा
मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में कहा था कि जिन किसानों को फसल का नुकसान ५० फीसदी से ज्यादा हुआ है, उनका बिजली बिल व कृषि ऋण की वसूली स्थगित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने सदन में माना कि ४ लाख हैक्टेयर में ओला-पाला से नुकसान हुआ है। इससे ४ लाख किसान प्रभावित हुए हैं। बड़ा हिस्सा सुरक्षित है। मुख्यमंत्री ने सदन में घोषणा की है कि जिन किसानों का ५० फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ है, उन किसानों को बेटियों की शादी के लिए २५ हजार रूपया सरकार देगी। वसूली स्थगित होने पर ऋण पर ब्याज सरकार देगी। वहीं रियायती दर पर किसानों को गेहूं-चांवल, शक्कर, मिट्टी तेल तथा नमक की आपूर्ति अगली फसल तक की जाएगी।

– विपक्ष की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री के भाषण से पहले मांग रखी थी कि ३० दिन में जिन किसानों का नुकसान हुआ है उन्हें मुआवजा मिले। बिजली बिल व ऋण वसूली के लिए जारी हुए सारे कुर्की आदेश वापस लिए जाएं। इसके अलावा एक रूपए मूल्य पर खाद्यान्न की व्यवस्था ६ माह तक के लिए की जाए।
बजट पारित होने के बाद फसल नुकसान की चर्चा पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जिन किसानों की ५० फीसदी से ज्यादा फसल बर्बाद हुई है, उनकी कर्ज व बिजली बिल की वसूली स्थगित की जाएगी। नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ने पांच सूत्रीय मांग रखी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में उनकी मांगों के संबंध में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। केवल घोषणायें कर वाहवाही लूटते हैं। उनकी घोषणाओं पर अमल नहीं होता है, जिसके कारण हमें धरने पर बैठना पड़ा। मुख्यमंत्री के भाषण के बाद नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मांगों के बारे में सरकार ने कुछ नहीं कहा।

– रात में हुआ रजाई और भोजन का इंतजाम
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरण शर्मा ने सत्र समाप्ति की घोषणा कर दी। इसके बाद कांग्रेस विधायक गर्भ गृह में धरने पर बैठ गए। सत्तापक्ष सदन से चला गया। रात १० बजे दिग्विजय फिर कांग्रेस विधायकों से मिले। थोड़ी देर बाद नरोत्तम मिश्रा पहुंचे। समझाने की कोशिश की। पुलिस फोर्स भी पहुंची। रात १२ बजे रजाई और भोजन लाया गया। कांग्रेस विधायक अभी भी धरने पर बैठे हुए हैं।