विदर्भ और मराठवाड़ा को राज्य का दर्जा दिलाने मुहिम तेज


-संघ खामोश, शिवसेना अखंड महाराष्ट्र के पक्ष में
मुंबई। छोटे राज्यों की हिमायती राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने पहले कभी महाराष्ट्र बंटवारे की बात कही थी, लेकिन अब वह खामोश है जबकि भाजपा के ही एक धड़े ने इस मांग को मजबूती से उठा दिया है। अब जबकि राज्य और वेंâद्र में भाजपा गठबंधन की ही सरकार है तो फिर संघ खामोशी अख्तियार किए हुए है। वहीं शिवसेना अखंड महाराष्ट्र की मांग पर कायम है।
जानकारी अनुसार भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में महाराष्ट्र बंटवारे का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। पार्टी के एक धड़े ने विदर्भ को अलग राज्य का दर्जा देने की मांग रखी है। चूंकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस खुद विदर्भ से हैं तो वो कुछ कहने की स्थिति में नहीं है, वहीं पार्टी के वरिष्ठ एवं राष्ट्रीय नेता नितिन गडकरी भी विदर्भ से हैं। इसलिए यदि ये नेता मांगकर्ताओं का तिल मात्र भी साथ दे देते हैं तो विदर्भ राज्य की नींव रखने से कोई रोक नहीं पाएगा। वहीं दूसरी तरफ मराठा नेताओं ने भी महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र को अलग राज्य बनाने की मांग कर रखी है। इस प्रकार मांग कर्ता विदर्भ और मराठवाड़ा नाम से दो अलग राज्य बनाने के पक्ष में हैं, वहीं शिवसेना ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अखंड महाराष्ट्र के पक्ष में है। गौरतलब है कि चुनाव के दौरान भाषण देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा कर दिया था कि उनके होते महाराष्ट्र का बंटवारा नहीं होगा। अब चूंकि संघ यूपीए सरकार के दौरान छोटे राज्यों की वकालत करते हुए विदर्भ और मराठवाड़ा के पक्ष में दिखती रही है तो अब वह खामोश है, क्योंकि राज्य और वेंâद्र में भाजपा गठबंधन सरकार जो है। ऐसे में अलग राज्य की बात करके सरकार के लिए परेशानी खड़ी करने से वो बच रही है। अभी यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि महाराष्ट्र के देवगिरी क्षेत्र के लोगों ने देवगिरी राज्य की मांग कर दी है। इस प्रकार महाराष्ट्र को चार भागों में बांटने की दिशा में विचार-विमर्श शुरू हो गया है, जो आगे चलकर आंदोलन का रूप भी ले सकता है। इसे देखते हुए संघ जहां खमोशी अख्तियार किए हुए है तो वहीं शिवसेना मुखर है।