रोहित-जेएनयू : कांग्रेस के मुद्दे को लेफ्ट ने लपका


नई दिल्ली ।  रोहित वेमुला और जवाहरलाल नेहरू विवि की घटना के मुद्दे पर सदन में कांग्रेस का ढीलाढाला रवैया वाम दलों और मायावती के लिए वरदान साबित हुआ है। पहले लग रहा था कि कांग्रेस ज्यादा आक्रामकता दिखाएगी लेकिन कांग्रेस के मुकाबले वाम ज्यादा मुखर ऩजर आया और मायावती ने दलित का मुद्दा उठाकर यूपी में चुनावी माहौल का संकेत भी दे दिया। बाकि दल दुविधा में दिखाई दिए।
राज्यसभा में मायावती ने रोहित वेमुला मामले पर शंखनाद कर दिया तो जेएनयू मामले को लेकर ले़फ्ट ने आगे बढ़ने की कोशिश की। इन दोनों मामलों को आगे बढ़ कर हाथ में लेने वाली कांग्रेस सदन में कहीं पीछे खड़ी ऩजर आयी। यहां तक कि कांग्रेस ने दोनों मुद्दों के बीच पहले फर्वâ नहीं किया और फिर राज्यसभा में मायावती की मांग के साथ खड़ी ऩजर आयी।
़गुलाम नबी आ़जाद ने राज्यसभा में मायावती की मांग से मांग मिलाते हुए कहा कि दोनों मुद्दों को अलग कर दीजिए। जेएनयू पर आज और वेमुला पर कल बहस करा लीजिए। इस पर चेयर ने कहा कि नोटिस अलग-अलग देना होगा। फिर प्रकाश जावड़ेकर ने याद दिलाया कि दोनों मुद्दों पर साथ बहस की मांग का नोटिस देने वालों में ़खुद आ़जाद भी शामिल हैं। मतलब कांग्रेस ने ही दोनों मुद्दों का घालमेल कर दिया।
हैदराबाद यूनिर्विसटी हो या जेएनयू सबसे पहले पहुंचने वालों में राहुल गांधी रहे। सदन में मामले उठाने की बात भी उन्होंने की। लेकिन जब मौ़का आया तो कांग्रेस पीछे रह गई. माना जा रहा है कि यूपी चुनाव में कांग्रेस मायावती के साथ हाथ मिलाने की कोशिश में जुटी है इसलिए दलित मुद्दे पर उन्हें आगे बढ़ने दिया।
उधर लोकसभा में बीजेपी ने बड़ी सफाई से जेएनयू मामले को सीधे राष्ट्रवाद से जोड़ कर राहुल गांधी पर जम कर प्रहार किए। कांग्रेस को इसी बात का डर था कि उसे कहीं राष्ट्रवाद के मुद्दे पर नुकसान न उठाना पड़ जाए।
हालांकि ज्योतिरादित्य िंसधिया ने राष्ट्रवाद और पूरे जेएनयू की छवि पर प्रहार को अलग करने की कोशिशि की। लेकिन बीजेपी ने अपने नेताओं से जेएनयू मामले पर आक्रामक रहने का ़फरमान जारी किया था इसी कारण स्मृति ईरानी ने पूरी तैयारी के साथ मैदान मार लिया।