रेडियो पर ‘मन की बात’ में बोले मोदी-ओबामा


नई दिल्ली। मंगलवार शाम रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों से रूबरू हुए। मन की बात की शुरुआत भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम का मतलब बताते हुए की। उन्होंने बताया कि अप्रâीकी देशों में प्रचलित स्वाहिली भाषा में बराक का मतलब ‘आशीर्वाद प्राप्त शख्स’ होता है। वहीं मेहमान अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान की शुरुआत नमस्ते से की। मोदी और ओबामा, दोनों ने ही लोगों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए। भारतीय प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति दोनों नेताओं ने अपने अपने संघर्ष की कहानी सुनाई। मन की बात के संबोधन के समापन पर मोदी ने कहा कि वह ‘मन की बात’ के इस एपिसोड की ई-बुक जारी करेंगे। हालांकि, ओबामा मंगलवार दोपहर ही सऊदी अरब के लिए रवाना हो गए, लेकिन इस कार्यक्रम को पहले ही रिकॉर्ड कर लिया गया था।
विशेष कार्यक्रम ‘मन की बात’
मन की बात के स्पेशल कार्यक्रम में आज अमेरिका के राष्ट्रपति श्रीमान बराक ओबामा जी हमारे साथ हैं। पिछले कुछ महीनों से मन की बात मैं आपसे करता आया हूं । लेकिन आज देश के भिन्न-भिन्न कोनों से बहुत से लोगों ने सवाल पूछे हैं । लेकिन ज्यादातर सवाल राजनीति से संबधित हैं, विदेश नीति से संबंधित हैं, र्आिथक नीति से संबंधित हैं, लेकिन कुछ सवाल वो हैं जो दिल को छूने वाले हैं । और मैं मानता हूं कि आज हमें उन सवालों को स्पर्श करने से, हम देश के कोने-कोने में सामान्य मानव तक पहुंच पायेंगे । और इसलिये जो पत्रकार वार्ताओं में उठाये जाने वाले सवाल हैं, या जो मीिंटगों में चर्चा में आने वाले सवाल हैं, उसके बजाय जो दिल से निकलने वाली बाते हैंए उसको अगर हम दोहराते हैंए उसको अगर गुनगुनाते हैं तो एक नई ऊर्जा मिलती है। और उस अर्थ में मैं समझता हूं कि ये सवाल मेरी दृाqष्ट से ज्यादा अहम रखते हैं । आप लोगों को मालूम है, कुछ लोगों के मन में सवाल उठता है बराक का अर्थ क्या है ? तो मैं जरा ढूंढ रहा था कि बराक का अर्थ क्या है ? तो स्वाहिली भाषा, जो कि अप्रâीकन कन्ट्रीज में प्रचलित है । स्वाहिली भाषा में बराक का मतलब है, वह जिसे आशीर्वाद प्राप्त है । मैं समझता हूं ये अपने आप में बराक के नाम के साथ एक बहुत बड़ा तोहफा भी उनके परिवार ने उनको दिया है ।
अप्रâीकन कन्ट्रीज उबन्तु के प्राचीन विचार का अनुकरण करती आई है । ये विचार मानवता में एकजुटता का विचार है मैं समझता हूं सदियों का भी अन्तर है, सीमाओं का भी अन्तर है, उसके बावजूद भी वही भाव जो भारत में हम कहते हैं, वसुधैव कुटुम्बकम, वही भाव दूर-सुदूर अप्रâीका के जंगलों से भी उगते हैं । तो ये, कितनी बड़ी विरासत हम मानव जाति के पास है । जो हमें जोड़ती है । जब हम महात्मा गांधी की चर्चा करते हैं तो हमें हैनरी थोरो की बात याद आती है जिनसे महात्मा गांधी क्पेवइमकपमदबम सीखे थे । और जब हम र्मािटन लूथर िंकग की बात करते हैं या ओबामा की बात करते हैं तो उनके मुंह से भी महात्मा गांधी का आदरपूर्वक उल्लेख सुनने को मिलता है । यही बातें हैं जो विश्व को जोड़ती हैं ।
भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि आज बराक ओबामा हमारे साथ हैं । मैं पहले उनसे रिक्वेस्ट करूंगा कि कुछ हमें बतायें । प्रधानमंत्री ने कहा कि जो मेरे लिये सवाल आये हैं उसका जवाब मैं दूंगा । जो बराक के लिये सवाल आये हैं उनका जवाब बराक देंगे ।
बराक से पहला सवाल उनकी बेटियों को लेकर किया गया। आप वापस जाने पर अपनी बेटियों को आप भारत के बारे में क्या बताएंगे?
जवाब : मेरी बेटियां भारत आने को उत्सुक थीं। स्वूâल की परीक्षाओं में व्यस्तता के कारण वे नहीं आ सकीं। भारत के स्वाधीनता संग्राम से वह बेहद प्रभावित हैं। वापस जाकर उन्हें बताऊंगा कि भारत उनकी कल्पना के अनुरूप ही भव्य है। मुझे पूरा यकीन है कि वे अगली बार भारत आने की जिद जरूर करेंगी।
ओबामा से सवाल : मोटापे और डायबिटीज जैसी चुनौतियों के खिलाफ मिशेल ओबामा काम कर रही हैं। आपका कार्यकाल खत्म होने के बाद भी क्या बिल गेट्स और उनकी पत्नी की तरह वे भारत में ऐसा काम करेंगी?
जवाब : मिशेल के प्रयासों पर मुझे गर्व है। मोटापे की समस्या पूरी दुनिया को चपेट में ले रही है। कुछ जगह छोटी उम्र में ही बच्चे इसके शिकार हो रहे हैं। इस दिशा में भारत और अन्य देशों के साथ मिलकर काम करेंगे।
मोदी से सवाल : मैंने (पाठक) वाइट हाउस के बाहर एक पर्यटक के रूप में आपकी पुरानी फोटो देखी है। आप जब दोबारा वाइट हाउस गए तो वैâसा महसूस हुआ?
जवाब : मुझे वाइट हाउस में एक बात ने छू लिया। बराक ने मुझे एक किताब दी थी। १८९४ में वह किताब प्रसिद्ध हुई थी। किताब विवेकानंद के धर्म संसद में दिए भाषण का संकलन थी। ओबामा ने किताब देते हुए गर्व के साथ कहा कि मैं उस शिकागो से आता हूं जहां विवेकानंद आए थे। इसने मेरे दिल को छू लिया।
बराक से सवाल : क्या आपने सोचा था कि एक दिन आप वाइट हाउस में बैठेंगे?
जवाब : मोदी जी आपकी तरह मैंने भी कभी नहीं सोचा था कि वाइट हाउस में रहूंगा। हम दोनों साधारण परिवारों में जन्मे हैं। हमें अपने देश में मौजूद असाधारण संभावनाओं का लाभ मिला है। हम जैसे लाखों बच्चों को भी यह मौका मिलना चाहिए।
मोदी से सवाल : कभी इस पद पर पहुंचेंगे, आपने यह कल्पना की थी?
जवाब : मैंने भी यह कभी कल्पना नहीं की थी। मैं भी सामान्य परिवार से आता हूं। कभी कुछ बनने नहीं करने के सपने देखने चाहिए। मैंने जीवन में कभी भी बनने का सपना नहीं देखा था।
मोदी से सवाल : आप किस अमेरिकन नेता से प्रभावित हैं?
जवाब : बचपन में हम जॉन वैâनेडी की फोटो देखते थे, मुझे वह अच्छे लगते थे। मैंने बेंजामिन प्रैंâकलिन का जीवन चरित्र पढ़ा। वह अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं थे। उनका जीवन चरित्र मुझे बेहद प्रेरक लगा। इसे हर किसी को पढ़ना चाहिए। मुझे आज भी इससे प्रेरणा मिलती है।
ओबामा से सवाल : इतनी कठिनाइयों के बाद भी आपकी खुशी और प्रेरणा का क्या राज है?
जवाब : मेरे पास वही समस्याएं आती हैं, जिन्हें हर कोई हल नहीं कर पाता। अगर वे आसान होतीं तो उन्हें कोई और हल कर चुका होता। मुझे सबसे अधिक प्रेरणा देता है लोगों के जीवन में प्रेरणा लाना। कई बार लोग आपको धन्यवाद देते हैं, जिनकी आपने ४-५ साल पहले मदद की होती है। जो आपको याद भी नहीं होते। अगर आपकी मंशा लोक कल्याण की हो, तो इसके संतोष की सीमा नहीं है।
कार्यक्रम के आखिर में मोदी ने अपने जीवन का एक प्रसंग सुनाया, उन्होंने कहा, ‘बचपन में एक परिवार बार-बार खाने के लिए बुलाता था, लेकिन मैं जाता नहीं था। मैं इसलिए नहीं जाता था, क्योंकि वह गरीब परिवार था। एक बार मैंने काफी जोर देने पर न्योता स्वीकार कर लिया। एक छोटी सी झोंपड़ी में बाजरे की रोटी और दूध दिया गया। उनका छोटा बच्चा दूध की ओर देख रहा है। मैंने दूध का कटोरा उसे दिया, तो वह उसे तुरंत पी गया। ऐसा लगा जैसे मां के दूध के सिवा उसने दूध देखा ही न हो। परिवार वाले नाराज थे कि उसने ऐसा क्यों किया। वे लोग मेरे लिए दूध खरीदकर लाए थे। मुझे यह घटना गरीबों के लिए काम करने की प्रेरणा देती है।’
विदित हो कि मोदी अक्टूबर से हर महीने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को रेडियो पर संबोधित कर रहे हैं। मोदी ने २२ जनवरी को ऐलान करते हुए कहा था कि इस महीने ‘मन की बात’ विशेष होगी जिसमें गणतंत्र दिवस पर हमारे मुख्य अतिथि बराक ओबामा और मैं अपने विचार साझा करेंगे।