राज्यसभा में खुद को मजबूत करेगी मोदी सरकार


नई दिल्ली। राज्यसभा में कमजोर पड़ती एनडीए सरकार को थोड़ा बल मिल सकता है। ६ राज्यों की १३ राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने जा रहा है। ये चुनाव २१ मार्च को होंगे। मोदी सरकार के पास उच्च सदन में कम सीटें हैं और इसी वजह से राज्यसभा में सरकार कमजोर पड़ जाती है लेकिन इन चुनावों के बाद मोदी सरकार की ताकत और बढ़ सकती है।
सरकार सात सीटों के लिए नामों की सिफारिश कर सकती है। इससे सरकार को महत्वपूर्ण बिलों पर दूसरों का मुंह नहीं देखना पड़ेगा। मोदी सरकार का सबसे अहम बिल जीएसटी बिल इसमें शामिल है।
आपको बता दें, पांच मनोनीत सदस्य २१ मार्च को रिटायर हो रहे हैं तो वहीं अशोक गांगुली और एचके दुआ पहले ही रिटायर हो चुके हैं। यहां आपके लिए ये जानना भी जरूरी है कि राज्यसभा की २४५ सीटों में से ७ सदस्य मनोनीत होते हैं। सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति ऐसे सदस्यों को चुनते हैं जो साहित्य, कला, खेल, विज्ञान या समाजसेवा के क्षेत्र में सफलता हासिल कर चुके हों। मनोनीत सदस्य किसी के पक्ष में नहीं होते हैं और ना ही उन्हें साथ देने के लिए बाध्य किया जा सकता है। वो चाहें तो सरकार का साथ दे सकते हैं या फिर विपक्ष का। अभी राज्यसभा में मनोनीत सदस्यों की संख्या १० है।
जहां तक २१ मार्च को होने वाले द्विवर्षीय चुनाव की बात है तो इसमें ज्यादा बदलाव होने की संभावना नहीं है। १३ सीटों में से अभी पांच कांग्रेस, तीन सीपीएम और एक-एक सीट भाजपा व एसडी के पास है। खाली होने जा रही पंजाब की पांच सीटों में से दो सीटें कांग्रेस, दो सीटें एसडी और एक सीट भाजपा के पास है।
नागा पीपल्स प्रंâट के खेकिहो जिमोनी का पिछले साल नवंबर में निधन हो गया था, जिसके बाद वो सीट खाली हो गई थी।
त्रिपुरा में खाली होने जा रही एक सीट सीपीएम के पास है। केरल से तीन सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से दो सीपीएम और एक कांग्रेस के पास हैं। असम में कांग्रेस की दो सीटें खाली हो रही हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश की इकलौती सीट फिलहाल भाजपा के पास है। पूर्व रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी, पूर्व कानून मंत्री अश्वनी कुमार और पूर्व चीफ इलेक्शन कमिश्नर एमएस गिल का कार्यकाल भी अप्रैल में खत्म होने जा रहा है