रघुराम राजन के बाद कौन ?


नई दिल्ली: रघुराम राजन के बाद रिजर्व बैंक का नया गवर्नर कौन, इस सवाल को लेकर अटकलों का बाजार गरम हो चुका है. सेबी प्रमुख यू के सिन्हा से लेकर भारतीय स्टेट बैंक की मुखिया अरूंधती भट्टाचार्य, रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर ऊर्जित पटेल, पूर्व डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण और विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु के नाम चर्चा में है.

रिजर्व बैंक के 24 वें गवर्नर के नाम का ऐलान जल्द ही कर दिया जाएगा. वैसे तो प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री के साथ चर्चा कर गवर्नर की नियुक्ति करते हैं, लेकिन समझा जाता है कि इस बार कैबिनेट सचिव की अगुवाई वाली एक सर्च कमेटी विभिन्न दावेदारों के बीच से पड़ताल और साझात्कार के बाद कोई एक नाम सुझाएगी, और तब उसकी नियुक्ति प्रधानमंत्री करेंगे. वैसे तो दावेदारों को लेकर कई नाम पर अटकलें चल रही है, लेकिन उनमें से पांच नाम मुख्य रूप से उभर कर सामने हैं.

  • रिजर्व बैंक के चार डिप्टी गवर्नर में से एक ऊर्जित पटेल
  • रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण
  • विश्व बैंक के प्रमुख अर्थशास्त्री कौशिक बसु
  • सेबी प्रमुख यू के सिन्हा, और
  • भारतीय स्टेट बैंक की मुखिया अरूंधती भट्टाचार्य

रघुराम राजन से करीब आठ महीने छोटे ऊर्जित पटेल का बतौर डिप्टी गवर्नर इसी साल कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ाया गया. ब्याज दर के मामले में गहरी पैठ रखने वाले पटेल लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और येल यूनिवर्सिटी से पढ़े लिखे हैं. देश में पहली बार महंगाई दर का लक्ष्य तय करने का फैसला भी पटेल की अगुवाई वाली कमेटी की सिफारिशो के आधार पर हुआ था.

2013 में ऊर्जित पटेल, सुबीर गोकर्ण के तीनि साल का कार्यकाल पूरा होने पर रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर नियुक्त किए गए. पटेल से चार साल बड़े गोकर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यकारी निदेशक है. मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई करने वाले गोकर्ण मौद्रिक नीति पर गहरी पकड़ ऱखते हैं.

गोकर्ण की तरह ही कौशिक बसु देश के जाने-माने अर्थशास्त्री हैं. इस समय में वो विश्व बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री के तौर पर काम कर रहे हैं. बसु यूपीए सरकार के कार्यकाल में मुख्य आर्थिक सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र बसु ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पीएचडी पूरी की.

कौशिक जब सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार थे, उस समय बिहार कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी उपेंद्र कुमार सिन्हा को सेबी का कार्यभार सौंपा गया. पूंजी बाजार का खासा लंबा अनुभव रखने वाले सिन्हा नयी पेंशन व्यवस्था का खाका तैयार करने और स्टैम्प पेपर को नयी शक्त देने के लिए जाना जाता है.

सेबी के मुखिया के तौर पर जानबुझ कर कर्ज नहीं चुकाने वालों को पूंजी बाजार से बाहर करने और सहारा के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का श्रेय भी सिन्हा को जाता है.

वैसे सिन्हा का बतौर सेबी प्रमुख कार्यकाल इस साल फरवरी में खत्म हो रहा था तो उनके दावेदारों के रूप में एक प्रमुख नाम उभरा था भारतीय स्टेट बैंक की मुखिया अरूंधती भट्टाचार्य. हालांकि किन्ही कारणों से सिन्हा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया गया, फिर भी अरूंधती की काबिलियत को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता.

भारतीय स्टेट बैंक की 24 वीं मुखिया भट्टाचार्य, बैंक की पहली महिला प्रमुख हैं. 60 वर्षीय भट्टाचार्य को लगभग चार दशकों को बैंकिंग का अनुभव है औऱ यही उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक की पहली महिला मुखिया बनने के लिए दावेदार बना रही है.

रिजर्व बैंक के गवर्नर की नियुक्ति पहले तीन साल के लिए की जाती है, फिर उनका कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ाया जा सकता है. गवर्नर 65 साल की उम्र तक अपने पद पर बने रह सकते है.