यूपी में योगी ‘राज’ का शुभारंभ, बने 22 कैबिनेट मंत्री


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में योगी आदित्यनाथ ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी शपथ में शामिल
मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पहुंचे शपथ में

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी का राज प्रारंभ हो गया। 44 साल के महंग योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वहीं केशव प्रसाद मौर्य और दिनश शर्मा को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। राज्यपाल राम नईक ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। लखनऊ में हुए शपथ सामारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ ही कई राज्यों के मुख्यमंत्री व बड़े नेता शामिल हुए। गौरतलब है कि शनिवार को ही योगी के नाम को भाजपा हाई कमान ने हरी झंडी दी थी।

मुलायम-अखिलेश भी पहुंचे शपथ में
भाजपा के कई बड़े नेता, समेत कई मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव भी वहां मौजूद थे। बता दें कि शनिवार को पार्टी विधायक दल की बैठक में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री चुना गया। वह राज्य के 21वें सीएम बने।

मोहसिन रजा अकेला मुस्लिम चेहरा, बने राज्यमंत्री
बीजेपी ने भले ही यूपी विधानसभा चुनावों में किसी मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में न उतारा हो, लेकिन यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कैबिनेट में मुस्लिम चेहरा शामिल किया है। पूर्व रणजी खिलाड़ी मोहसिन रजा को योगी टीम में राज्यमंत्री बनाया गया है। मोहसिन अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं है। मोहसिन रजा मूलत लखनऊ के ही रहने वाले हैं। वह कुछ दिन पहले ही बीजेपी में शामिल हुए थे और उन्हें प्रवक्ता भी बनाया था। रजा रणजी मैच भी खेल चुके हैं। यूपी में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और वक्फ बोर्ड समेत कई ऐसे निगम हैं जिनका अध्यक्ष मुस्लिम ही होता है। ऐसे में मोहसिन रजा को सरकार में मंत्री बनाया गया है। 40 वर्षीय मोहसिन रजा ने गवर्नमेंट जुबली इंटरकॉलेज से पढ़ाई की है। इसके बाद की पढ़ाई लखनऊ विश्वविद्यालय से की। रजा अभी यूपी में किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। नियम के मुताबिक, अगर छह महीने के अंदर रजा को विधानसभा के किसी एक सदन का सदस्य बनना जरूरी है।

कौन-कौन बना कैबिनेट मंत्री

सूर्य प्रताप शाही, कैबिनेट मंत्री?
सूर्य प्रताप शाही, कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं। शाही प्रदेश की पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों में गृहमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और आबकारी मंत्री के पदों पर रह चुके सूर्यप्रताप शाही इस बार देवरिया की पथरदेवा सीट से विधानसभा में पहुंचे हैं। उन्होंने 1984 की इंदिरा लहर में भी कसया सीट से जीत हासिल की थी। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे शाही ने 1985 से 1989 तक, 1991 से 1993 और 1996 से 2002 तक कसया विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

स्वामी प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री
22 जून 2016 को बसपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य पडऱौना से विधायक हैं। स्वामी बसपा के नेता विधायक दल और विधानसभा में नेता विपक्ष रह चुके हैं। चार बार विधायक रह चुके स्वामी, बसपा राज में कैबिनेट मंत्री थे। कांगे्रस के वरिष्ठ नेता आरपीएन सिंह 2009 में पडऱौना विधानसभा की सीट खाली कर सांसद बने तो उपचुनाव में स्वामी प्रसाद विजयी हुए। इसके बाद 2012 और 2017 में भी उन्होंने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा।

डॉ. रीता बहुगुणा जोशी (कैबिनेट मंत्री)
प्रदेश की राजनीति में 67 वर्षीय रीता बहुगुणा जोशी का नाम जाना पहचाना। रीता जोशी राज्य के दिवंगत राजनेता हेमवतीनंदन बहुगुणा की पुत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके विजय बहुगुणा की बहन हैं। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में मध्यकालीन तथा आधुनिक इतिहास की प्रोफेसर रहीं रीता वर्ष 1995 से 2000 तक इलाहाबाद की महापौर (मेयर) भी रही हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ कैंट विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर जीतीं। इस बार भी वह इसी सीट से भाजपा से विधायक बनी हैं।

ब्रजेश पाठक (कैबिनेट मंत्री)
बसपा से पूर्व सांसद रहे ब्रजेश पाठक इस चुनाव में भाजपा में शामिल हो गए थे। बसपा में दलित-ब्राह्मण गठजोड़ की शुरुआत पाठक ने ही की थी। हरदोई के रहने वाले बृजेश पाठक ने लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति से सियासी जीवन की शुरुआत की और छात्रसंघ अध्यक्ष भी चुने गए थे।

सिद्धार्थनाथ सिंह (कैबिनेट मंत्री)
भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाती सिद्धार्थनाथ सिंह वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता हैं। सिद्धार्थनाथ ने हाल में हुए विधानसभा में चुनाव में इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं। इन्होंने यहां से बसपा विधायक पूजा पाल को 25336 वोटों से हराया है। सिद्घार्थनाथ आंध्रप्रदेश में भाजपा के प्रभारी हैं और पश्चिम बंगाल में पार्टी के सह प्रभारी भी हैं। वह भाजपा के राष्ट्रीय सचिव भी हैं।

आशुतोष टंडन उर्फ गोपाल टंडन (कैबिनेट मंत्री)
लखनऊ पूर्वी सीट से भाजपा नेता लालजी टंडन के बेटे आशुतोष टंडन उर्फ गोपाल टंडन इस बार दोबारा विधायक बने हैं। उन्होंने करीब-करीब एकतरफा जीत में कांग्रेस के अनुराग भदौरिया को 80 हजार वोटों से हराया।
नंद गोपाल गुप्ता नंदी (कैबिनेट मंत्री)
यह इलाहाबाद शहर दक्षिणी से इस बार भाजपा के टिकट पर विधायक बने हैं। नंदी इससे पहले बसपा से विधायक थे। बसपा की पूर्व सरकार में मंत्री भी रहे। इस विधानसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हुए।

श्रीकांत शर्मा (कैबिनेट मंत्री)
वृंदावन सीट से विधायक और भाजपा प्रवक्ता व राष्ट्रीय सचिव का श्रीकांत शर्मा मीडिया में पार्टी का पक्ष प्रमुखता से रखने के लिए जाने जाते हैं। इन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और अरुण जेटली का करीबी भी माना जाता है। शर्मा का जन्म मथुरा हुआ और शुरुआती शिक्षा भी यहीं से हुई। लेकिन बाद उच्च शिक्षा के लिए वह दिल्ली आ गए। दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज से स्नातक करने के दौरान आरएसएस के संपर्क में आए और भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी में सक्रिय छात्र नेता के रूप में उभरे। कहा जा रहा है कि जब यह डीयू में थे तब यहां एनएसयूआई का कब्जा था लेकिन इन्होंने कुछ ऐसे काम किया जिसका बाद में एबीवीपी को फायदा मिला।

संगीत सोम (कैबिनेट मंत्री)
पश्चिमी यूपी से भाजपा के फायरब्रांड नेता संगीत सोम का नाम मुजफ्फरनगर दंगों के कारण विवादों में रहा। सोम मेरठ की सरधना सीट से विधायक हैं। इनकी छवि भी एक हिन्दुवादी नेता की है।
रमापति शास्त्री (कैबिनेट मंत्री)
मनकापुर सुरक्षित से जिले में रिकॉर्ड मतों से जीते रमापति शास्त्री पहले भी स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। 15 अक्टूबर 1952 में जन्मे श्री शास्त्री स्नातक है। और शास्त्री उपाधि मिली है। प्रदेश महामंत्री रहे शास्त्री कांशी प्रांत के प्रभारी भी रहे। जनसंघ से 77 में चुनाव लड़ पहली बार विधायक बने। उसके बाद 77 मे जनता पार्टी से और 91 मे भाजपा जीते। कल्याण सिंह के कार्यकाल में समाज कल्याण और महिला कल्याण के साथ राजस्व मंत्री रहे। इसके बाद फिर कल्याण सरकारऔर राम प्रकाश गुप्ता सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे। 85 से 90 तक अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश महामंत्री रहे। दो बार युवा मोर्चा प्रदेश महामंत्री भी रहे। राजनाथ सरकार में भी स्वास्थ मंत्री रहे। इसके अलावा पार्टी के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। 1975 में डीआईआर मे जेल भी गये। राम मंदिर आंदोलन में भाग लिया और जेल गये।

सतीश महाना (कैबिनेट मंत्री)
महराजपुर विधानसभा क्षेत्र से सातवीं बार विधानसभा चुनाव जीते हैं। महाना के पिता राम अवतार महाना देश बंटवारे के बाद शहर के लालबंगला की रामगली काली मंदिर के सामने आकर बस गए। इनके पिता राम अवतार आरएसएस के प्रांत सेवक रह चुके हैं। बजरंगदल से राजनीति में उतरे सतीश महाना पांच बार कानपुर कैंट विधानसभा क्षेत्र से तथा परिसीमन के बाद 2012 से महराजपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत रहे हैं। भाजपा की पिछली सरकारों में महाना राज्यमंत्री रह चुके हैं।
एसपी सिंह बघेल (कैबिनेट मंत्री)
इनका पूरा नाम सत्यपाल सिंह बघेल है। यह फिरोजाबाद के टूंडला से विधायक चुने गए हैं। 1993 में राजनीति में आते ही पुलिस की सब इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ी। मूल रूप से औरैया के रहने वाले हैं। 1998 में लोकसभा का चुनाव सपा की टिकट पर जलेसर सीट से जीता। वह इस सीट से लगातार तीन बार सांसद रहे। 2009 में सपा से अनमन हुई और बसपा का दामन थाम लिया। 2009 में बसपा के टिकट पर फिरोजाबाद में विस चुनाव अखिलेश यादव के खिलाफ लड़ा और दूसरे नम्बर पर रहे। अखिलेश के सीट छोडऩे पर हुए उप चुनाव में राजबब्बर से हार गए। 2010 में बसपा से राज्यसभा सांसद बने। 2014 में बसपा से भी मोह भंग हुआ और भाजपा का दामन थाम लिया। 2014 में फिरोजाबाद से लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन सपा सांसद अक्षय यादव से हार गए। भाजपा ने बघेल को पिछड़ा वर्ग आयोग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। विस चुनाव फिरोजाबाद की टूंडला (सुरक्षित सीट) विस से चुनाव लडऩे का फैसला लिया और अपना राष्ट्रीय अध्यक्षपद छोड़ दिया।

सत्यदेव पचौरी (कैबिनेट मंत्री)
स्वरूपनगर निवासी सत्यदेव पचौरी छात्रसंघ चुनाव से राजनीति में आए। हलीम कॉलेज इंटरमीडिएट करने के बाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ राजनीति में सक्रिय रहे। बाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष भी बनाए गए। पहला चुनाव आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से जीते थे। पिछले वर्ष गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता और तीसरी बार भी गोविंदनगर से ही जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। मिलनसार व्यवहार के धनी पचौरी ब्राह्मण समाज से आते हैं। क्षेत्र में अच्छी पकड़ है।

चेतन चौहान (कैबिनेट मंत्री)
अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेटर चेतन चौहान वर्ष 1991 से 1996 व 1998 से 1999 तक दो बार अमरोहा लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे हैं। 21 जुलाई 1947 को जन्मे चेतन को खेलों में प्रतिभाग के लिए 1981 में अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया। भाजपा की सरकार बनने पर जून 2016 में केंद्र सरकार की ओर से नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फैशन टेक्नालॉजी (एनआईएफटी) का चेयरमैन नियुक्त किया गया। विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें अमरोहा की नौगावां सादात विधानसभा से मैदान में उतारा था। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी व सीएम के बेहद करीबी दर्जा मंत्री मौलाना जावेद आब्दी को तकरीबन 28 हजार वोटों से हराकर विधानसभा पहुंचे।

चौधरी लक्ष्मी नारायण
मथुरा जिले की राजनीति में इनकी अच्छी पकड़ है। इस बार वह फिर मथुरा से विधायक चुने गए हैं। जिला पंचायत चुनाव 2015 को भाजपा ने उत्तरप्रदेश में केवल एक ही स्थान से विजयश्री हासिल की थी और वह जगह मथुरा जिला पंचायत थी। चौधरी लक्ष्मी नारायण की पत्नी ममता चौधरी मथुरा जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं।

नए सीएम के बारे में जानें
आदित्यनाथ की पहचान विवादित नेता के रूप में रही है। विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा रैलियां करने वाले आदित्यनाथ पूर्वांचल के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं। भाषणों में लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दों को उन्होंने जोर शोर से उठाया था। आदित्यनाथ का असल नाम अजय सिंह नेगी है और वह उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से हैं।
योगी आदित्यनाथ (अजय कुमार बिष्ट) 5 जून 1972 को उत्तरकाशी में जन्म। 15 फरवरी 1994 को गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी बने। उन्होंने गढ़वाल विश्विद्यालय से गणित में बीएससी किया है। गोखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया जिसके बाद 1998 में वह सांसद चुने गए।

5 बार से लगातार जीत रहे हैं
योगी आदित्यनाथ जब 12वीं लोकसभा में सांसद बनकर पहुंचे तब उनकी उम्र मात्र 26 साल थी। इसके बाद आदित्यनाथ 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी लगातार सांसद चुने जाते रहे। सितंबर 2014 में उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ के प्राण त्यागने के बाद वह गोरखपुर मंदिर महंत यानी पीठाधीश्वर बने। योगी आदित्यनाथ भाजपा के सांसद होने के साथ साथ हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं। हिन्दू युवा वाहिनी युवाओं का एक सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी समूह है।

लव जेहाद के लिए हुए प्रसिद्ध
योगी धर्मांतरण के खिलाफ और घर वापसी के लिए काफी चर्चा में रहे। 2005 में योगी आदित्यनाथ ने कथिततौर पर 1800 ईसाइयों का शुद्धीकरण कर हिन्दू धर्म में शामिल कराया। ईसाइयों के इस शुद्धीकरण का काम उत्तर प्रदेश के एटा जिले में किया गया। लव जेहाद के लिए भी वे कई बार बयान देते हुए नजर आए।

तब बाल-बाल बचे थे योगी
7 सितंबर 2008 को सांसद योगी आदित्यनाथ पर आजमगढ़ में जानलेवा हिंसक हमला हुआ था। इस हमले में वे बाल-बाल बचे थे, यह हमला इतना बड़ा था कि सौ से अधिक वाहनों को हमलावरों ने घेर लिया और लोगों को लहुलुहान कर दिया।