मोदी सरकार ने पांच हजार करोड़ के लंबित टैक्स मामले सुलझाए


– कर विवाद सुलझने से विदेशी निवेशक भारत में निवेश को बढ़ावा देंगे
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पारस्परिक समझौता प्रक्रिया (एमएपी) का सहारा लेकर दो साल के अंदर ही विभिन्न देशों के साथ विवादित ५,००० करोड़ रुपए के टैक्स मामले सुलझा लिए हैं। जिन देशों से जुड़े टैक्स के लंबित मामले सुलझाए गए हैं, उनमें अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और जापान हैं। ये मामले सॉफ्टवेयर, सूचना प्रौद्योगिकी, मैन्यूपैâक्चिंरग और परामर्श सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित थे। माना जा रहा है कि कर विवाद सुलझने से विदेशी निवेशक भारत में निवेश करने को प्रोत्साहित होंगे। वेंâद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने मंगलवार को कहा कि एक अप्रैल २०१४ से अब तक ५,००० करोड़ रुपए के १८० मामले एमएपी के माध्यम से सुलझाए गए हैं। सीबीडीटी ने विदेशी निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए जो कदम उठाए हैं उनमें से यह एक है। इससे विवाद निस्तारण की निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित हुई है।
उल्लेखनीय है कि एमएपी प्रक्रिया का प्रावधान दोहरे कराधान निवारण समझौतों (डीटीएए) में किया गया है। इसका इस्तेमाल कर प्रशासन और विदेशी निवेशक दोनों ही कर सकते हैं। भारत ने विभिन्न देशों के साथ डीटीएए पर हस्ताक्षर किए हुए हैं। इन समझौतों का मकसद यही है कि एक दूसरे देश में निवेश करने वाली वंâपनी को दोहरे कराधान से बचाया जा सके। दुनियाभर में तमाम देश निवेशकों के साथ लंबित कर मामलों को सुलझाने के लिए एमएपी का इस्तेमाल करते हैं। सीबीडीटी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में आयकर विभाग ने एमएपी प्रक्रिया के माध्यम से कर विवाद सुलझाने पर खासा जोर दिया है। इसी का परिणाम है कि इतनी बड़ी संख्या में मामले निपटाए जा चुके हैं।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी कर विवादों के त्वरित निपटारे के लिए मौजूदा व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। अक्सर कर विवाद लंबे िंखचने के कारण विदेशी निवेशक देश में निवेश करने से परहेज कर सकते हैं। दो देशों के बीच दोहरे कराधान निवारण समझौते में एमएपी का प्रावधान होता है। ऐसे देशों के अगर किसी निवेशक को लगता है कि दूसरे देश में उससे अर्तािकक कर मांग की गई तो वह अपने देश में इस संबंध में उपयुक्त प्राधिकार का सहारा ले सकता है। ओईसीडी के सदस्य देशों में इसका काफी प्रचलन है। आमतौर पर एमएपी में किसी मामले को सुलझने में एक से सवा साल तक लग जाता है। आमतौर पर एमएपी में जाने वाले अधिकांश मामले सुलझ जाते हैं।