मोदी लहर से तेज ‘आप’ की आंधी


नईदिल्ली। वर्ष २०१३ से विधानसभा और लोकसभा चुनाव से मोदी लहर के आगे ‘आप’ की आंधी हावी पड़ी। दिल्ली में १४ महीने बाद हुए चुनाव न सिर्पâ दिल्ली की जनता के लिए ही नहीं आम आदमी के लिये भी अहम साबित रहे। दिल्ली चुनाव से अरिंवद केजरीवाल का राजनीतिक भविष्य जुड़ा हुआ है। अगर दिल्ली में आप की सरकार बन जाती है तो मोदी लहर को रोकने का व्रेâडिट मिलेगा। चुनाव में उठाए मुद्दों की वजह से केजरीवाल मिडिल क्लास के नेता माने जाएंगे और पार्टी विस्तार कर सकेगी लेकिन अगर केजरीवाल हारे तो लोकसभा चुनाव में पार्टी की बुरी गत के बाद दिल्ली भी हाथ से निकल जाएगी।
० शाह की रणनीति पेâल
लोकसभा चुनाव से अमित शाह की चुनावी रणनीति का डंका अब थम गया। चुनाव बाद अमित शाह अध्यक्ष बने और उन्होंने महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में भाजपा को शानदार जीत दिलाई वहीं जम्मू कश्मीर में भाजपा िंकग मेकर की भूमिका में हैं। अब अगर दिल्ली में भाजपा जीतती है तो फिर अमित शाह चुनावी रणनीति के चाणक्य बनकर उरभेंगे लेकिन अगर बीजेपी हार जाती है तो फिर उनके कई पैâसलों पर सवाल उठेंगे।
० बिहार, प.बंगाल, यूपी के चुनाव पर असर
दिल्ली चुनाव का असर इस साल होने वाले बिहार और उसके बाद पाqश्चम बंगाल और यूपी के चुनाव पर पड़ सकता है। दिल्ली में भाजपा की जीत होती है तो फिर वो पूरे उत्साह के साथ बाकी राज्यों में विजय पताका फहराने में जुट जायेगी लेकिन अगर दिल्ली में भाजपा तो फिर बिहार, पाqश्चम बंगाल और यूपी के चुनाव पर भी असर पड़ सकता है और मोदी विरोधी नया समीकरण तैयार हो सकता है।
० बजट पर पड़ेगा असर
दिल्ली चुनाव का असर बजट सत्र पर भी दिख सकता है। दिल्ली में अगर भाजपा की जीत होती है तो फिर बीजेपी नये उत्साह के साथ संसद में विपक्ष का सामना करेगी लेकिन अगर बीजेपी की हार होती है तो फिर विपक्ष एकजुट हो सकता है और फिर इसका असर तमाम अध्यादेश को पास कराने में पड़ सकता है।