मोदी के सामने किसे लाए, कांग्रेस के लिये बढ़ी मुश्किलें


नईदिल्ली। भले ही अजय माकन को दिल्ली चुनाव में कांग्रेस ने प्रचार की कमान सौंपी हो, लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से किसे प्रचार और रैली के लिए उतारा जाए, इसे लेकर पार्टी कन्फ्यूज है। पार्टी के रणनीतिकार फिलहाल तय नहीं कर पा रहे हैं कि कांग्रेस की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी के सामने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या उपाध्यक्ष राहुल गांधी में से किसकी रैली कराई जाए।
महाराष्ट्र और हरियाणा असेंबली चुनावों तक राहुल और सोनिया ने पार्टी के प्रचार में रैलियां की थीं, लेकिन उसके बाद हुए कश्मीर और झारखंड चुनावों में कांग्रेस हाई कमान ने मोदी के बजाय कम रैलियां कीं, लेकिन पार्टी का मानना है कि देश की राजधानी होने के कारण राजनीतिक रूप से दिल्ली और उसके चुनाव काफी महत्वपूर्ण हैं। प्रचार को लेकर पार्टी के रणनीतिकारों के सामने कई गंभीर मुद्दे हैं। पार्टी समझ नहीं पा रही है कि दोनों की बराबर से रैली कराई जाएं या फिर किसी एक को प्रमुखता से आगे लाया जाए। चर्चा है कि मोदी की दिल्ली में ११ रैलियां होनी हैं। यही बात कांग्रेस के लिए िंचता का मुद्दा बन रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रचार के लिए सोनिया या राहुल को लेकर दो मत उभर रहे हैं। एक राय है कि कांग्रेस अध्यक्ष की रैलियों को प्रमुखता से आयोजित किया जाए, लेकिन जिस तरह से राहुल को बड़ी जिम्मेदारी देने की बात की जा रही है, उसे देखते हुए और कांग्रेस अध्यक्ष का ढीली सेहत को देखते हुए पार्टी इसे लेकर दुविधा में है। दूसरी ओर राहुल गांधी की पिछली रैलियों के जमीनी असर को देखते हुए पार्टी पसोपेश में है। दिल्ली के पिछले असेंबली चुनावों में आंबेडकर नगर में हुई राहुल गांधी की रैली के अनुभव, चुनाव बाद मोदी और राहुल की रैलियों के नतीजों की तुलना जैसी बातों ने भी पार्टी को िंचता में डाला हुआ।