मॉडल एग्रीकल्चर लैंड लीिंजग एक्ट, लाने वाली है सरकार


नई दिल्ली । भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बड़े स्तर पर भूमि सुधार की तैयारी कर रही है। इसके तहत ही सरकार मॉडल एग्रीकल्चर लैंड लीिंजग एक्ट, २०१६ लाने वाली है। इस कदम से सरकार का मानना है कि कृषिगत क्षमता बढ़ाने व गरीबी दूर करने में मदद मिलेगी। एक्ट के अनुसार, जमीन मालिक अब कानूनन लीज कॉन्ट्रैक्ट कर पाएगा। इस कॉन्ट्रैक्ट में कृषि भूमि को कृषि या संबंधित कार्य के लिए नियत समय के लिए शर्तों के साथ देने के लिए जमीन मालिक व इसे लीज पर लेने वालों के बीच आपसी समझ के साथ नियम व शर्तें तय होंगी। कृषि व संबंधित कार्यों में खाद्य व गैर-खाद्य फसल उत्पादन, चारा या घास, फल व साqब्जयां, पूâल, कोई अन्य बागवानी फसल या वृक्षारोपण, पशुपालन व डेयरी, पॉल्ट्री फाा\मग, पशु प्रजनन, मछली पालन, कृषि वानिकी, कृषि प्रसंस्करण और कृषि व कृषक समूहों से जुड़े अन्य कार्य शामिल हैं। एक बार इस मॉडल एक्ट को राज्य सरकारें अपना लेंगी तो यह अन्य किसी भी दूसरे एक्ट की जगह ले लेगी और राज्य सरकारों द्वारा इस बाबत नोटिफिकेशन जारी किए के साथ ही यह आqस्तत्व में आ जाएगा।
इससे सरकार के लिए पाqब्लक और पाqब्लक-प्राइवेट पार्टनरशिप प्रॉजेक्ट्स के लिए जमीन लीज पर लेना भी आसान हो जाएगा। इससे औद्योगिकीकरण के लिए जमीन लेने के रास्ते भी खुलेंगे। इस एक्ट के तहत जमीन पर मालिक का मालिकाना हक बना रहेगा। भूमि अधिग्रहण बिल, २०१३ के संसद में अटकने के बाद राज्य सरकारों को विभिन्न परियोजनाओं के लिए जमीन लेने में मुाqश्कल हो रही है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वे औद्योगिकीकरण की योजना पर किस तरह आगे बढ़ें।
वर्तमान में प्रभावी लैंड टेनेंसी का जो कानून है, उसमें मालिकाना हक किरायेदार को ट्रांसफर करने की इजाजत है, लेकिन जमीन को लीज पर देने या सब-लीज करने को हतोत्साहित किया जाता है। नीति आयोग ने पिछले साल सितंबर में टी. हक के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ समिति बनाई थी। उसे मॉडल एग्रीकल्चरल लैंड लीिंजग एक्ट के बारे में सुझाव देने के लिए कहा गया था। कमिटी ने इस बारे में राज्यों के साथ बात की है। नीति आयोग ने समिति की सिफारिशों के आधार पर ड्राफ्ट एक्ट बनाया।