मुलायम के पैंतरे पर महागठबंधन की नजर


पटना । बिहार में जीत से उत्साहित महागठबंधन उत्तर प्रदेश में भी अपने लिए संभावनाओं का दरवाजा खोलने की कोशिश में है, लेकिन मौसम अनुवूâल नहीं जानकर अभी प्रतीक्षा की रणनीति पर चल रहा है। कहा जा रहा है कि राजद-जदयू के बड़े नेता उत्तर प्रदेश के महारथियों के पैंतरे को भांपने के बाद ही कोई कदम उठाएंगे।
सपा सुप्रीमो मुलायम िंसह यादव के कारसेवकों पर दिए गए ताजा बयान के बाद महागठबंधन के नेताओं ने अपनी रफ्तार थोड़ी धीमी कर ली है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव मार्च, २०१७ में संभावित है। माना जा रहा है कि तीन-चार महीने में तस्वीर कुछ साफ होने के बाद ही बिहार की सियासी गतिविधियों की उत्तर प्रदेश में सक्रिय इंट्री होगी।
फिलहाल उत्तर प्रदेश के दो बड़े दलों (बसपा और सपा) ने साफ कर दिया है कि वे गठबंधन की राजनीति नहीं करेंगे। जाहिर है मायावती और मुलायम दोनों एकला चलो की राह पर हैं। भाजपा और कांग्रेस का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखकर जदयू यह मान कर चल रहा है कि सपा और बसपा अपने दम पर भाजपा से मुकाबला करने में सक्षम नहीं हैं।
यह भी सच है कि राजद और जदयू दोनों के पास उत्तर प्रदेश में कुछ नहीं है। ऐसे में कांग्र्रेस का सहारा है, जिसके दम पर नीतीश कुमार अपने आधार वोट में पकड़ मजबूत कर सकते हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को उत्तर प्रदेश में घेरने की तैयारी कर रहे महागठबंधन के दलों को मुलायम के पैंतरे का भी इंतजार है।
मुलायम ने कारसेवकों पर गोली चलाने के पैâसले पर अफसोस जताकर भाजपा विरोधी दलों को हैरत में डाल दिया है। ऐसे में नीतीश-लालू समेत तमाम दिग्गजों के पास प्रतीक्षा ही एकमात्र विकल्प है। मुलायम का अगला कदम क्या होगा, जब तक स्पष्ट न हो जाए तब तक किसी भी दल के लिए रणनीति बनाना आसान नहीं होगा।
दूसरी ओर लखनऊ में इसी हफ्ते जदयू की उत्तर प्रदेश कमेटी की बैठक है, जिसमें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव और राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी को भी जाना है। उधर बनारस में पटेल नवनिर्माण सेना द्वारा नीतीश कुमार के अभिनंदन समारोह की तैयारी चल रही है, लेकिन नीतीश की ओर से अभी तक इसकी स्वीकृति नहीं दी गई है। उत्तर प्रदेश के कुछ बड़े नेता चाहते हैं कि नीतीश इस कार्यक्रम में शिरकत करें।