मुफ्ती सरकार बनने से पहले तय थी मसरत की रिहाई : सूत्र


नईदिल्ली। जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेता मसरत आलम की रिहाई पर बवाल मचा है। मुफ्ती सरकार ने शनिवार को मसरत आलम को रिहा किया था। अब खबर आ रही है मसरत आलम को रिहा करने का पैâसला १ मार्च को मुफ्ती मोहम्मद सईद की सरकार बनने से पहले हो गया था। मसरत की रिहाई का पैâसला जम्मू कश्मीर में ४९ दिनों के राज्यपाल शासन के दौरान ही ले लिया गया था। सूत्रों के मुताबिक फरबरी में राज्य के गृह सचिव सुरेश कुमार ने जम्मू के जिलाधिकारी को एक चिठ्ठी लिखी थी। इस चिठ्ठी में कहा गया था कि मसरत आलम के खिलाफ के जन सुरक्षा कानून के तहत जोरी किया गया नजरबंदी का आदेश सितंबर २०१४ में ही खत्म हो गया था। इस चिठ्ठी के सामने आने के बाद सरकार की मुाqश्कलें बढ़ सकतीं हैं। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी बिना जानकारी के मसरत की रिहाई हुई और देश की एकता और अखंडता से समझौता नहीं होगा। प्रधानमंत्री के जवाब से पहले संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया था। विपक्ष की मांग के बाद पीएम ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वेंâद्र की जानकारी के बगैर कश्मीर की सरकार ने पैâसला लिया है। मसरत पर २००८ से २०१० में भारत विरोधी मुहिम चलाने का आरोप है। उसने भारत विरोधी मुहिम- गो इंडिया गो चलाई थी, उसे २०१० में भारत विरोधी िंहसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बताया जाता है कि कि मसरत प्रदर्शनों के दौरान पत्थरबाजी की घटनाओं को अंजाम देता था जिसमें में सौ से ज्यादा लोगों की जान गई थी। मसरत की गिरफ्तारी के बाद पत्थरबाजी की घटनाएं भी बंद हो गई थीं।