मुंबई से यूरोप तक चलेगी मालगाड़ी, जानिए पूरी योजना


नई दिल्ली। मुंबई से यूरोप तक माल परिवहन के लिए अहम मानी जा रही अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) परियोजना को पूरी तरह से रेल लाइन पर आधारित बनाने के लिए मोदी सरकार पाकिस्तान रेलवे से पारगमन सुविधा प्राप्त करने के प्रयास शुरू करेगी। भारत अभी इस कॉरिडोर से मुंबई के जवाहर लाल नेहरू बंदरगाह से जुड़ा हुआ है। यह कॉरिडोर ईरानी समुद्र तट पर बंदर अब्बास से उत्तरी ईरान में वैâाqस्पयन सागर के तट पर बंदर अंजाली तक रेलमार्ग से तथा वहाँ से वैâाqस्पयन सागर में रूस के अस्त्राखान तक समुद्रीमार्ग और अस्त्राखान से सेंटपीटर्सबर्ग तक रेलमार्ग पर बनाया गया है। इस परियोजना को भविष्य में दक्षिण एवं पाqश्चम एशिया तथा यूरोप एवं मध्य एशिया के बीच अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख मार्ग के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रूस, अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान की यात्रा तथा भारत ईरान संयुक्त आयोग की बैठक में इस परियोजना की समीक्षा की गई और इसमें अवरोधों को दूर करने एवं अधिक उपयोगी बनाने पर सहमति बनी है। भारत ने पाकिस्तान के लाहौर को ईरान की पूर्वी सीमा पर ़जायदान से रेलवे लाइन को जोड़े जाने के प्रस्ताव को आगे बढ़ाना शुरू किया है। हाल ही में तेहरान में हुई एक बैठक में भारतीय रेलवे के अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर चर्चा की है। भारत से लाहौर के बीच रेलवे लाइन चालू है। उस पर समझौता एक्सप्रेस संचालित होती है। पाकिस्तान रेलवे का ईरान के रेलवे से ़जायदान सीमा पर संपर्वâ है। अगर पाकिस्तान भारत से मालगाड़ियों को ़जायदान तक पारगमन की इजा़जत दे दे और ईरान में बंदर-अंजाली के पास रष्ट से लेकर ईरान-अजरबैजान सीमा पर अस्तरा तक रेलवे नेटवर्वâ बन जाए तो भारत से सीधे सेंटपीटर्सबर्ग तक रेलवे नेटवर्वâ होगा। पाकिस्तान अगर रेलवे पारगमन सुविधा दे देता है तो वह भी इस बहुदेशीय परियोजना में शामिल हो सकता है और उसके विदेश व्यापार में भी खासा इजाफा हो सकता है। इसके साथ ही भारत ने ईरान सरकार के साथ रष्ट से लेकर अस्तरा तक रेलवे नेटवर्वâ बनाने की संभावनाओं पर बात की है। आईएनएसटीसी के बारे में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में सितंबर २००० में भारत, ईरान और रूस ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत यूरोप एवं रूस के लिए भारत से माल परिवहन का एक वैकाqल्पक मार्ग का प्रस्ताव किया गया था। इस परियोजना में मुंबई से सड़क मार्ग से ईरान के बंदर अब्बास तक समुद्री मार्ग से, वहां से देश की उत्तरी सीमा पर अमीराबाद बंदरगाह से वैâाqस्पयन सागर में रूस के अस्त्राखान बंदरगाह तक पुन: समुद्री मार्ग से तथा अस्त्राखान बंदरगाह से आगे रूस के सेंटपीटर्सबर्ग तक रेलमार्ग से माल परिवहन करने का प्रस्ताव रखा गया। एक अन्य मार्ग बंदर अब्बास से सड़क मार्ग से अजरबैजान की राजधानी बावूâ और वहाँ से रेल मार्ग से आगे माल परिवहन का प्रस्ताव भी है। लेकिन इस मार्ग में ईरान में बंदर-अंजाली के पास रष्ट से अस्तरा के बीच संपर्वâ का अभाव एक बाधा है।
सितंबर २०१४ में भारत की पहल पर मुंबई से बंदर अब्बास और वहाँ से वैâाqस्पयन सागर में अमीराबाद बंदरगाह से अस्त्राखान बंदरगाह और फिर वहाँ से रेलमार्ग से सेंटपीटर्सबर्ग तक का खाली वंâटेनरों का ड्राई रन किया गया था जो पारंपरिक स्वेज नहर और अटलांटिक महासागर के मार्ग की तुलना में लागत में ४० फीसदी सस्ता और मालवहन अवधि में तीस प्रतिशत की बचत वाला साबित हुआ है। इसके बाद सदस्य देशों ने इस परियोजना पर अधिक दिलचस्पी दिखानी शुरू की।
इस संपूर्ण परियोजना की व्यवहार्यता को देखते हुए दस अन्य देशों – ओमान, अजरबैजान, कजाखस्तान, किर्गीजिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्की, यूव्रेâन, आर्मेनिया, बेलारूस और सीरिया ने भी साझेदारी के लिये दस्तखत किये। इसके अलावा बुल्गारिया की इच्छा पर उसे विशेष पर्यवेक्षक के रूप में शामिल किया गया। इस परियोजना में उज़्बेकिस्तान और तुर्वâमेनिस्तान विशेष आमंत्रण के रूप में मौजूद हैं जबकि अफ़गानिस्तान और कुवैत ने भी इस परियोजना में शामिल होने की इच्छा जतायी है। इस बीच ईरान-कजाखस्तान रेलमार्ग भी इस परियोजना में शामिल किये जाने से मध्य एशियाई देश भी सक्रिय रूप से आईएनएसटीसी के मानचित्र पर आ गये हैं जिससे खाड़ी देश भी इस परियोजना में दिलचस्पी ले रहे हैं।