माल्या ने खोली उद्योग जगत की पोल


नई दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय के शिवंâजे में पंâसे विजय माल्या ने सरकार का पैसा दबाकर बैठे बड़े उद्योगपतियों की पोल खोलना शुरू कर दिया है. माल्या के करीबियों का कहना है कि सरकार उनसे भी बड़े डिफाल्टरों को बचा रही है. दरअसल राष्ट्रीयकृत बैंकों के ४ लाख करोड़ रूपये हड़पने की बात लम्बे समय से की जा रही है, सूत्रों का कहना है कि रूपये हड़पने वालों में सत्ता प्रतिष्ठान की कृपा प्राप्त कुछ बड़े कारोबारी भी हैं जिनकी गिरेबान तक प्रवर्तन निदेशालय नहीं पहुँच पाया है. इसीलिये माल्या ने अब बड़े डिफाल्टरों को भी बेनकाब करने का बीड़ा उठाया है. माल्या प्रकरण के बहाने देश में बड़े डिफाल्टरों पर सख्ती बरतने की मांग भी जोर पकड़ सकती है. विपक्षी दल भी इसे मुद्दा बना सकते हैं कि केवल माल्या पर ही क्यों?
ज्ञात रहे कि एसबीआई के नेतृत्व में १७ सरकारी और निजी बैंकों के वंâर्शोिशयम का िंकगफिशर लिमिटेड पर ७,८०० करोड़ रुपये बकाया है. माल्या वंâपनी के प्रमुख हैं.एसबीआई को एयरलाइंस से १,६०० करोड़ रुपये वसूलने है. जनवरी, २०१२ से एयरलाइंस ने ऋण के लिए कोई भुगतान नहीं किया है. एयरलाइन को ऋण देने वाले बैंकों के गठजोड़ में पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, केनरा बैंक, बैंक आफ इंडिया, सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, पेâडरल बैंक, यूको बैंक और देना बैंक शामिल हैं.
डीआरटी ने अपने आदेश में डियाजियो पर माल्या को ७.५ करोड़ डॉलर की राशि के भुगतान से रोक दिया है. उसने कहा कि मूल अपील के निपटान तक यह राशि जब्त रहेगी. इसके अलावा डीआरटी ने माल्या और संबंधित वंâपनियों को अंतिम करार के ब्योरे का खुलासा करने को भी कहा है. इस आदेश से कुछ घंटे पहले ही माल्या ने कहा था कि वह बैंकों के साथ िंकगफिशर एयरलाइंस पर बकाया ऋण के एकबारगी निपटान के लिए बातचीत कर रहे हैं.
पिछले साल एसबीआई ने माल्या को जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाला यानी विल्पुâल डिफॉल्टर घोषित किया था. पिछले महीने पीएनबी ने भी माल्या को जानबूझकर चूक करने वाले घोषित किया है. इस बीच सोशल मीडिया पर एक खबर यह भी प्रसारित हो रही है कि जामनगर की रिलायंस इंडस्ट्रीज पर बकाया एक हजार ७२ करोड़ का टैक्स गुजरात सरकार ने माफ कर दिया है. यदि यह खबर सच साबित हुयी तो अवश्य खलबली मचेगी।