मां के भरोसे ने हनमंथप्पा को रखा ़िजंदा


नई दिल्ली । पिछले दिनो सियाचिन में आए बर्फीले तूफान की चपेट में १० जवान के लापता होने से किसी को भी उनके बचने की उम्मीद ऩजर नहीं आ रही थी। सेना की ओर से भी बयान जारी कर कहा गया कि हादसे में सभी जवानों के बचने का चांस न के बराबर हैं। लेकिन कोई नहीं जानता था कि बर्पâ के २५ फीट नीचे एक चमत्कार सबका इंतजार कर रहा है। मंगलवार को सियाचिन से लांस नायक हनमंथप्पा के बचने की खबरों ने जैसे किसी रोगी के शरीर में जान डालने वाले टॉनिक का काम किया। हनमंथप्पा की मां का कहना है कि उन्हें मालूम था कि उनका बेटा एक दिन उनके पास जरूर लौटेगा। यह शायद मां का भरोसा और उसके प्यार की ताकत ही थी जिसने उस जगह पर उसके बेटे की िंजदगी बचा ली, जहां किसी के बचने के चांस १० प्रतिशत से भी कम होते हैं। लांस नायक हनमंथप्पा उत्तरी कर्नाटक के बेतादूर के रहने वाले हैं। उनका परिवार अब दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है। दिल्ली रवाना होने से पहले उनकी मां ६० वर्षीय बेसाम्मा ने कहा कि उन्हें इस बात का पूरा भरोसा था कि उनके बेटा उनके पास जरूर लौटेगा। मां के चेहरे पर चमक और आंखों में खुशी, उनका उत्साह बयां करने के लिए काफी थी। बेसाम्मा के साथ लांस नायक हनमंथप्पा की पत्नी महादेवी भी दिल्ली के लिए रवाना हुई है। हनमंथप्पा की मां को जब सियाचिन से तूफान की खबर आई थी तो वह एकदम टूट गई थीं। अब उनकी खुशी किसी से छिप नहीं रही है। हनमंथप्पा के रिश्तेदार रमेश कोप्पाड ने बताया कि आखिरकार उन सबकी प्रार्थनाएं अब रंग ले आई हैं। हनमंथप्पा के िंजदा होने की खबर सुनकर वह सब बहुत खुश हैं। हनमंथप्पा बहुत ही मेहनती हैं और वह एक गरीब किसान परिवार से आते हैं। हनमंथप्पा का परिवार उन लोगों के दर्द से भी वाकिफ है कि जिन्होंने इस हादसे में अपने घर के प्यारे सदस्य को गंवा दिया है। हनमंथप्पा इस समय दिल्ली के आर्मी रेफरल एंड रिसर्च हॉाqस्पटल में भर्ती हैं जहां पर उनका इलाज चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हनमंथप्पा को देखने पहुंचे थे। उनके परिवार को यकीन है कि सेना की ओर से हनमंथप्पा को सर्वश्रेष्ठ इलाज मुहैया कराया जाएगा।