मांझी ने जो कुछ भी किया है वह बगावत नहीं बल्कि धोखा है: नीतीश


नई दिल्ली। जेडीयू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बारे में आज कहा कि उन्होंने जो कुछ भी किया है, वह बगावत नहीं बल्कि धोखा है। नीतीश ने आज कहा, ‘‘मांझीजी को सत्ता सौंपे जाते समय स्पष्ट बताया गया था कि कामकाज का रोडमैप तैयार हैं ठीक ढंग से सरकार चलाते हुये इसे आगे बढाइयें मगर वह रोडमैप के अनुसार कामकाज को आगे बढाने की बजाय अलग प्रकार वैकल्पिक सरकार की तरह काम करने लगे। इससे सुशासन की धज्जियां उडने लगीं और लोक परेशान होकर हम लोगों से शिकायत करन लगे। पूर्व मुख्यमंत्र्री ने कठपुतली सरकार चलाने की कोशिश सम्बंधी आरोपों को खारिज करते हुये कहा कि उनका सरकार से कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने तो मांझी को सत्ता सौंप दी थी। वह ही अपनी मर्जी की करते गए और कहते रहे कि उनका मौन समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं तो दो-तरफा मार झेल रहा था। जनता भी दुखी थी और बीजेपी भी कोस रही थी। उन्होंने कहा कि संपर्क यात्राओं और कार्यकार्ताओं के प्रशिक्षण शिविरों में जो फीड बैक उन्हें मिला, उससे पार्टी ऐसा फैसला करने पर मजबूर हुई। इससे पहले कई बार उन्हें (मांझी) समझाने की कोशिशें हुई, मगर कोई सुधार नहीं हुआ। मांझी जी को सत्ता सौंपने के अपने फैसले पर नीतीश ने कहा कि वह एक भावनात्मक फैसला था। उन्होंने कहा, ‘‘लोकसभा के चुनाव में जब आशानुरुप वोट नहीं मिला तो मुझे लगा कि लोगों के बीच काम करना और उनका विश्वास हासिल करना चाहिये, मगर जिस प्रकार पूरे प्रदेश में किसी ने भी इसे सही नहीं कहा और मांझी के कामकाज का विरोध किया तो लगा कि मुझे अपना फैसला सुधारना चाहिये। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र्र और जीवन में सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है। राज्यपाल द्वारा उन्हें सत्ता के लिये उतावला कहे जाने के सवार पर नीतीश कुमार ने कहा कि अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो यह अनुचित होने के साथ संवैधानिक पद की मर्यादा के अनुरुप भी नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए। नीतीश ने कहा कि गत नौ फरवरी को मुलाकात के दौरान राज्यपाल हमलोगों की इस दलील से सहमत दिखे कि आगामी २० तारीख से आहूत बिहार विधानसभा के बजट सत्र में पहले दिन वह किसका अभिभाषण पढेंगे और बाद में कौन सरकार बजट पेश करेगी। मगर जब उन्होंने आदेश जारी किया तो यह उनके पूर्व के रुख से भिन्न था। इससे न केवल खरीद-फरोख्त को बढावा मिलेगा बल्कि वे सवाल भी अनुत्तरित रह जायेंगे जो हमलोगों ने पहले व्यक्त किया था। मांझी के बिहार विधानसभा में आगामी २० फरवरी को विश्वास मत हासिल करने के लिए गुप्त मतदान के राज्यपाल द्वारा दिये गये विकल्प के बारे में नीतीश ने कहा कि दल-बदल कानून के बाद यह हो ही नहीं सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई लोकप्रिय सरकार गुप्त मतदान से चुनी जायेगी। उसके पास नैतिक और राजनैतिक बल होगा। इसलिये सदन में खुले मतदान से ही नेता का चुनाव होना चाहिये। नीतीश ने कहा कि मांझी द्वारा इस्तीफा नहीं दिये जाने पर पार्टी ने उन्हें निकाला है। उन्होंने दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की ऐतिहासिक जीत को बीजेपी के कथित अलगाववाद, झूठे वादों और अहंकार की हार बताया और आप को नई किस्म की पार्टी बताते हुये उन्हें शुभकामनायें दी। उन्होंने क्रिकेट विश्वकप के लिये भारतीय टीम को शुभकामनाएं देते हुये कहा वे जीतें और देश का गौरव बढाएं।