महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री आर.आर.पाटिल का निधन


सियासत में बड़ा झटका
मुंबई। पिछले तीन दशक से महाराठ्र की राजनीति में सक्रिय और बेहद इमानदार छवि के रूप में पहचाने जाने वाले महाराठ्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और पूर्व गृहमंत्री आर.आर.पाटील का सोमवार दोपहर मुंबई के लीलावती अस्पताल में निधन हो गया। उनके मुंह के कैंसर का इलाज चल रहा था। पाटिल को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। पाटिल की रेडिएशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और अभी कीमोथैरेपी दी जा रही थी। यह जानकारी सोमवार को यहां उनका इलाज कर रहे एक डॉक्टर ने दी इसके पहले लीलावती अस्पताल में उनका इलाज कर रहे डॉ.संजय उगेमोघे ने पत्रकारों से कहा था कि ५७ वर्षीय पाटिल फिलहाल स्थिर है। उन्होंने कहा, ‘हम उन्हें इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए अपनी तरफ से बेहतर प्रयास कर रहे हैं। इलाज का उन पर असर हो रहा है।’ पार्टी नेताओं अजीत पवार, सुप्रिया सुले, सुनील तटकरे, छगन भुजबल ने अस्पताल का दौरा कर पाटिल के स्वास्थ्य का जायजा लिया था। इस बीच दोपहर खबर आई कि पाटील अब नहीं रहे। बता दें कि पाटिल का पिछले वर्ष दिसंबर में ब्रीच कैंडी अस्पताल में मुंह का ऑॅपरेशन हुआ था और वर्तमान में उनका लीलावती अस्पताल में इलाज चल रहा था। बता दें कि इससे पहले डॉक्टर उनकी बीमारी के बारे में अटकलें लगा रहे थे तथा वहां उनके उपचार के तरीके का भी खुलासा नहीं किया जा रहा था। उधर एनसीपी के सूत्रों ने बताया कि इससे पहले पाटिल का हृदय संबंधी रोग का उपचार किया जा रहा था, जिसके लिए पिछले महीने बॉम्बे हॉस्पिटल में इनकी एंजियोग्राफी भी की गई थी। उनके अनुसार एक अन्य अस्पताल में उन्हें मुंह के रोग के लिए दवाइयां भी दी जा रही थी। पाटिल का दक्षिण मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में मुंह संबंधी रोग की शल्य चिकित्सा भी की जा चुकी है।
– आर.आर.पाटील के जीवन पर एक नजर
महाराठ्र के सांगली जिले के तासगांव विधानसभा सीट से वो लगातार ६ बार विधायक रहे। एनसीपी के वरिष्ठ नेता रावसाहेब रामराव पाटिल को महाराष्ट्र में लोग आर.आर.पाटिल के नाम से जानते थे। कांग्रेस-एनसीपी की सरकार में आर.आर.पाटिल उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री रहे। १६ अगस्त १९५७ को महाराष्ट्र के सांगली जिले के अंजनी गांव में जन्में पाटिल का महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा कद था। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के बेहद करीबी माने जाने वाले पाटिल को कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन वाली सरकार में हमेशा नंबर दो की कुर्सी मिली। ५७ साल के पाटिल ने १९९० से लगातार ६ बार सांगली जिले के तासगांव से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वर्ष २०१४ में मोदी लहर के बावजूद आर.आर.पाटिल अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। पाटिल २००३ से २००८ तक महाराष्ट्र के गृहमंत्री रहे। इसी दौरान उन्हें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। वर्ष २००९ में कांग्रेस-एनसीपी के गठबंधन वाली सरकार के दोबारा सत्ता में आने पर उन्हें फिर से महाराष्ट्र के गृह मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पाटिल अक्टूबर २००९ से सितंबर २०१४ तक दोबारा महाराष्ट्र के गृहमंत्री रहे। आर पाटिल कई बार अपने बयानों को लेकर भी विवादों में रहे। २००८ में मुंबई हमले के बाद उनके बयान को लेकर विपक्षी दलों ने आर.आर.पाटिल पर निशाना साधा था। जिसके बाद आर.आर.पाटिल को उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। आर.आर.पाटिल को उनके विधानसभा क्षेत्र के लोग और करीबी आबा नाम से बुलाते थे।
– बेहद ईमानदार छवि
आर.आर.पाटील के छोटे भाई सब इंस्पेक्टर थे, जब तक ये गृहमंत्री रहे उनको कोई पोस्टिंग नहीं मिली। २००८ में जब इन्हें इस्तीफा देना पड़ा तो उसके बाद इनको लगातार संपर्क करने की कोशिश की गई। उस वक्त इनका मोबाइल नहीं मिला। फिर पता चला कि मोबाइल इन्होंने ऑॅफिस में ही छोड़ दिया था। और अपने गांव चले गए।