‘मन की बात’ पीएम ने कहा-कल मेरी भी परीक्षा है


सचिन तेंदुलकर और विश्वनाथन आदंन से दिए बच्चों को संदेश 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 17वीं बार देश से मन की बात की। इस बार पीएम ने अपने मन की बात में बच्चों को बोर्ड परिक्षाओं के लिए सफलता के मंत्र दिए। साथ ही, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और विश्वनाथन आनंद के अलावा मुरारी बापू और वैज्ञानिक प्रो. सीएनआर राव के संदेश भी सुनाए।

‘मन की बात’ की शुरुआत करते हुए पीएम ने देश के लाखों बच्चों के माता-पिता को संबोधित करते हुए कहा कि आपके साथ मुझे भी बच्चों की परीक्षा की चिंता है। उन्होंने पहली बार मन की बात कार्यक्रम में नामी हस्तियों के संदेश सुनाए। इस दौरान उनके साथ सचिन तेंदुलकर और विश्वनाथन आनंद भी मौजूद थे।

सचिन तेंदुलकर का संदेश

नमस्कार! मेरा नाम सचिन तेंदुलकर है। मैं समझ सकता हूं आपके पैरेंट्स, दोस्तों सबको आपसे उम्मीदें होंगी। लोगों की उम्मीदें आपसे हमेशा रहेंगी। इसलिए आप अपने टार्गेट सेट करें और अपनी उम्मीदों को पूरा करने की कोशिश करें। अपनी सोच को सकारात्मक रखिए, तभी अच्छे नतीजे आएंगे। टेंशन फ्री होकर पर्चा लिखें। गुड लक।

सचिन का संदेश समाप्त होने के बाद पीएम ने कहा कि बच्चों उम्मीद है कि आपको सचिन तेंदुलकर के संदेश से प्रेरणा मिली होगी। सफलता के लिए दूसरों से प्रतियोगिता करने के बजाय खुद से प्रतियोगिता करें। परीक्षा को अंकों का खेल मत मानों, अपने जीवन को महान उद्देश्य के साथ जोड़ना चाहिए।

खुद को परीक्षा के लिए तैयार करने के लिए पीएम ने बच्चों को बताया कि खुद को परीक्षा के दौरान अपने स्वास्थ्य का ख्लाल रखें। अच्छी नींद और तनावमुक्त पढ़ाई करें। अपने लिए अनुशासन बनाएं और उसक पालन करें।

विश्वनाथन आनंद का संदेश

हेलो! मैं विश्वनाथन आनंद हूं। सबसे पहले परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं। मैं अपने परीक्षा के दिनों को याद करते हुए कहता हूं कि अच्छी नींद लें। मैं यह कहना चाहूंगा कि कभी भी खाली पेट परीक्षा देने नहीं जाएं। अतिआत्मविश्वास ठीक नहीं है, लेकिन आत्मविश्वास को खोने नहीं दें। मैं सभी बच्चों को कहना चाहूंगा कि मन को शांत रखें और परीक्षा हॉल में बिल्कुल भी नर्वस न हों।

इसके बाद पीएम ने कहा कि परीक्षा के दिनों में खुद का मन शांत रखने की कोशिश करें। अगर कोई बात याद आए तो गहरी सांस लेकर खुद का शांत करने की कोशिश करें। एक उदाहरण देते हुए कहा कि पानी भले ही गहरा हो, लेकिन अगर ठहरा हुआ होता है तो हम पानी की गहराई में मौजूद चीजों को देख पाते हैं लेकिन अगर उसमें पत्थर मार दिया जाए तो हम कुछ नहीं देख पाते। इसी तरह अापका मन है जिसमें ढेरों चीजें जो सालभर पढ़ी थीं वो भरी हेैं मन शांत रहेगा तो आप सब अच्छा कर पाएंगे।

मुरारी बापू का संदेश

नमस्कार! मेरा नाम मुरारी बापू है। विद्यार्थी परीक्षा के समय मन पर कोई भी बोझ न रखें। चित को एकाग्र करके परीक्षा में बैठिए।

इसके बाद पीएम ने कहा कि योग से मन को एकाग्र रखा जा सकता है। इसके बाद उन्होंने कहा कि हमारी आदत है कि परीक्षा में जाने की जल्दबाजी करते हैं। अगर हम समय का सही मैनजमेंट करें तो हमे जल्दबाजी नहीं करनी पड़ेगी।

सीएनआर राव का संदेश

चिंता न करें, अपनी बेहतर कोशिश करें, देश में बहुत कुछ करने के अवसर मिलेंगे। मैं अच्छी तरह समझता हूं कि परीक्षा के दौरान बहुत घबराहट होती है। खास तौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान बच्चे चिंतित रहते हैं। चिंता नहीं करें, अपना सर्वश्रेष्ठ दें।

पीएम मोदी ने कहा कि देखा! वैज्ञानिक का कमाल। जो बात मैं आधे घंटे में समझा पाता हूं, प्रोफेसर राव ने तीन मिनट में ही समझा दी।

पीएम मोदी ने बच्चों को कई महान लोगों जिनमें थॉमस अल्वा एडिसन, जेके रोवलिंग आदि का उदाहरण देते हुए कहा कि इन्होंने सफलता प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया। मोदी ने कहा कि परीक्षा सिर्फ बच्चों की नहीं, उनके माता-पिता, स्कूल की भी होती है। बच्चों पर बहुत अधिक दबाव न बनाएं उन्हें अपने अनुसार जाने दें।

इस दौरान पीएम ने नेशनल साइंस डे की भी जानकारी दी। साथ ही, बच्चों को परीक्षा के लिए शुभकामनएं देते हुए कहा कि कल बजट है और मेरी भी परीक्षा है। उम्मीद है हम सब सफल होंगे।

पीएम ने कहा कि 8190881908 नंबर पर मिसकॉल देकर आप अपनी मातृभाषा में भी मन की बात सुन सकते हैं।

गौरतलब है कि तीन अक्टूबर, 2014 को इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। इसमें प्रधानमंत्री मोदी आम जनता से मिले सुझावों को भी साझा करते हैं।