मथुरा फायरिंग: शहीद एसपी के पिता ने ठुकराया मुआवजा, कहा-चूल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए सरकार को


उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के राजकीय उद्यान जवाहर बाग में अवैध कब्जा जमाए लोगों और पुलिस के बीच हुई भिड़ंत में एसपी सिटी मुकुल दिवेद्धी और एसएचओ संतोष यादव समेत 18 लोग मारे गए हैं. इस हिंसा में 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. एसपी सिटी मुकुल दि्ववेदी यूपी के औरैया जिले के विधूना कोतवाली क्षेत्र के मानी कोठी के रहने वाले थे. एसपी सिटी के शहीद होने की सूचना मिलने के बाद उनके पैतृक गांव मानी कोठी में माहौल गमगीन हो गया. अपने बेटे के शहीद होने की सूचना के बाद उनके परिजन मथुरा के लिए रवाना हो गए हैं. बताया जा रहा है कि शव गृहजनपद आने के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा.  मुकुल द्विवेदी के घर पर उनके माता-पिता रहते हैं, जबकि एक भाई बाहर दुबई में नौकरी करते हैं. अपने बेटे के शहीद होने के बाद पिता ने मीडिया को बताया कि दो साल से कब्जे की जगह कोर्ट के आदेश के वावजूद सरकार खाली नहीं करा पाई. ऐसी सरकार को चूल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए. मुकुल द्विवेदी के परिजनों ने सरकार के मुआवजे को लेकर कहा कि उन्हें ये पैसा नहीं चाहिए, बल्कि हमसे पैसा ले लो लेकिन हमारा बेटा वापस कर दो.  दरअसल, मुकुल द्विवेदी यूपी पुलिस के साहसी और जांबाज अफसर के तौर पर जाने जाते थे. अराजक हालातों में भी उन्होने कभी हार नहीं मानी और पुलिस अफसर के तौर पर हमेशा जनता के बीच जाकर बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश की. बुलंदशहर में सीओ सिटी के तौर पर सन् 2008 में तैनाती के दौरान एक बड़ी घटना हुई थी. पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के कुख्यात सरगना जतन सिरोही के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद जिला अस्पताल में उसकी समर्थक भीड़ ने डेरा जमा लिया था. बात 29 जून 2008 की है. हजारों की तादाद में जमा भीड़ ने जिला अस्पताल में तोड़फोड़ की थी. थोड़ी फोर्स होने के बाबजूद मुकुल द्विवेदी ने साहस दिखाते हुए भीड़ से मोर्चा लिया और पथराव करने वाले बलबाइयों को वहां से खदेड़ने दिया.

कई पुलिसवाले अभी भी लापता, मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
मथुरा । मथुरा के जवाहर बाग की बागवानी विभाग की करीब १०० एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे को हटाने पहुंची पुलिस और कब्जेधारियों के लिए बीच हुए भीषण संघर्ष में एसपी (सिटी) मुकुल द्विवेदी और थाना प्रभारी संतोष कुमार की मौत हो गई और करीब एक दर्जन से अधिक पुलिसवाले घायल हुए हैं और कई पुलिसकर्मी अभी भी लापता हैं। इस िंहसा में १९ उपद्रवियों की भी मौत हुई है तथा ४० से अधिक लोग घायल हो गए हैं। फिलहाल जवाहर बाग को खाली करवा लिया गया है। साथ ही २५० लोगों को हिरासत में लिया गया है। यहां से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं। बताया जा रहा है कि अवैध कब्जे को हटाने गई पुलिस को भी यह अंदाज नहीं था कि ये लोग इतने ज्यादा हथियारों से लैंस है। ाुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एचआर शर्मा ने बताया कि करीब ३००० अतिक्रमणकारियों ने पुलिस दल के मौके पर पहुंचने पर उस पर पथराव किया और फिर गोली चलाई। पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े और फिर जवाबी कार्रवाई के तहत गोली चलाई। मथुरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी विवेक मिश्रा ने बताया कि टकराव में पांच विरोधकर्ता और दो पुलिसकर्मी मारे गए। वहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले में फायिंरग की जांच के आदेश दिए है। जांच का जिम्मा आगर के कमिश्नर प्रदीप भटनागर को सौंपा गया है। दरअसल, अपने को र्धािमक संगठन बताने वाले एक समूह के सदस्यों ने दो साल से अधिक समय से पार्वâ पर कब्जा कर लिया था। अदालत से आदेश के बावजूद पुलिस उन्हें अभी तक यहां से निकालने में विफल रही थी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपर पुलिस महानिदेशक को मौके पर जाकर ाqस्थति को तत्काल काबू करने के निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने घटनास्थल पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और दोषियों को गिरफ्तार करने का निर्देश भी दिया है। अखिलेश यादव ने घटना में शहीद थानाध्यक्ष के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके परिजनों को २० लाख रूपये की र्आिथक सहायता का ऐलान किया है।

भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद
बताया जा रहा है कि मथुरा के जवाहर बाग में पिछले कई दिनों से गोला बारूद इकट्ठा किया जा रहा था। कब्जाधारियों के पास से ५० से ज्यादा पिस्तौल, २०० से ज्यादा जिन्दा कारतूस, ७ रायफल बरामद किया गया हैं। बाग के सभी एंट्री प्वाइंट पर माइंस तक बिछा ली गर्इं थीं। भारी गोला बारूद भी वैंâप में था। जब आग लगी तो इनके वैंâप में तेज धमाका हुआ। ढाई साल से जवाहरबाग पर कब्जा जमाए बैठे लोगों के पास गोला बारूद के साथ ही अवैध असलहों का भी जखीरा पहुंच गया था। यह हथियार कोई एक दो दिन में तो इकट्ठा किए नहीं गए होंगे बाqल्क पिछले कई दिनों से इसकी कवायद चल रही थी। इन लोगों ने मथुरा में बड़ी वारदात को अंजाम देने की पूरी प्लािंनग कर ली थी। खास बात यह है कि किसी को कानोंकान खबर तक नहीं हुर्इं। खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े नहीं हुए। जिस तरह से इन लोगों ने पुलिस पर हमला किया उससे साफ है कि यहां भारी गोला बारूद था। कारतूस भी बरामद किए गए हैं। पेट्रोल बम का भी भंडार इनके पास था। कब्जाधारियों के पास कई लग्जरी गाड़ियां थीं।

शहीद पुलिसर्किमयों के परिजनों को २०-२० लाख
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शहीद पुलिसर्किमयों के परिजनों को २०-२० लाख रुपए राहत राशि देने की घोषणा के साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रर्वाई का आदेश दिया है। पूरे मामले जांच आगरा के मण्डलायुक्त प्रदीप भटनागर को सौंपी गई है। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पुलिस बल के साथ वैंâप कर रहे हैं।
वहीं इस मामले में खुलासा हुआ है कि मथुरा के डीएम को इस ऑपरेशन के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी क्योंकि, वो चाहते थे कि शनिवार को यह कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही जिले के एस.एस.पी. और डी.एम. के बीच आपसी तालमेल की कमी का मामला भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि एसी सिटी अपनी टीम के साथ मौके पर मुआयना और रेकी करने गए थे। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है।

अजीबोगरीब थी मांगें
बताया जा रहा है कि जवाहर बाग में पिछले दो-ढाई साल से धरने के नाम अतिक्रमण कर रखे इन लोगों की मांगे बढ़ी अजीब थी। जैसे भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का चुनाव रद्द करना, वर्तमान करेन्सी की जगह ‘आजाद िंहद फौज’ करेन्सी शुरू करना, एक रुपये में ६० लीटर डीजल और एक रुपये में ४० लीटर पेट्रोल की बिक्री करना शामिल है।

राजनाथ ने हरसंभव मदद का दिया आश्वासन
केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से चर्चा की और पूरी घटना की जानकारी ली। उन्होंने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री को हरसंभव मदद का आश्वासन भी दिया।