भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन सरकार के गले की फांस


नई दिल्ली। वेंâद्र सरकार का भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रस्ताव पर भारी हंगामा होना तय है। वेंâद्र सरकार भ्रष्टाचार निरोधक कानून के अनुच्छेद १२ एवं १६ में संशोधन करने जा रही है। इसका फायदा कारपोरेट जगत तथा शासकीय उपक्रमों के लिए बचाव के रूप में किया जा रहा है।
भूमि अधिग्रहण कानून की तरह यह प्रस्ताव भी सरकार के गले में फांस की तरह होगा। समाजसेवी अन्ना हजारे द्वारा इस कानून में प्रस्तावित संशोधन को लेकर आंदोलन तथा विपक्ष के तीखे हमलों से सत्ता पक्ष को बचाव करना होगा।
इस बिल को पास कराने में सरकार को भूमि अधिग्रहण कानून से ज्यादा कवायद करना पड़ेगी उसके बाद भी यह बिल पास हो सकेगा या नहीं इसको लेकर अटकलों का दौर चल पड़ा है। विपक्ष इस संशोधन प्रस्ताव पर सदन के अंदर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है। वहीं अन्ना टीम बर्धा से शुरू हो रही है जन जागरण पद यात्रा में सारे देश में मोदी सरकार की कथनी और करनी को निशाने पर लेकर सदन वेâ बाहर को घेरने की तैयारी में जुटी है।
अनुच्छेद १२ में निजी वंâपनियों को अपने वित्तीय खातों, रिकार्ड, आडिट तथा बही खातों को पारदार्शिता तथा सरकारी ऑडिट के दायरे में लाना था। झूठे दस्तावेजों पर उन पर आपराधिक कार्यवाही का प्रावधान है।
इसी तरह १६ वें अनुच्छेद में शासकीय उपक्रम की वंâपनियों तथा उनके अधिकारियों को जवाबदेह बनान, रिश्वत तथा भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पारदर्शिता के साथ दोषी पाये जाने पर अपराधिक कार्यवाही का प्रावधान था।
सरकार इन दोनों प्रावधानों में संशोधन कर निजी वंâपनियों तथा सार्वजनिक क्षेत्र की वंâपनियों को भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन कर निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र की वंâपनियों को राहत देने की तैयारी कर रही है। इसका अन्ना टीम और विपक्ष द्वारा भारी विरोध किया जा रहा है।