भारत में पहले से ही दाऊद ने बुक करवा ली है अपनी कब्र


मुंबई। अंडरवल्र्ड माफिया दाऊद इब्राहिम और उसकी मां का बेहद करीबी रिश्ता था। ये रिश्ता दाऊद की एक ख्वाहिश से साबित होता है। दाऊद चाहता था कि उसे अपनी मां के बगल में दफनाया जाए। शायद इसीलिए दाऊद के कुनबे ने दाऊद समेत तमाम लोगों की कब्र की एडवांस बुकिंग भी कर ली। जी हां, आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि दाऊद की कब्र पहले से बुक है। दाऊद इब्राहिम वो इंसान जिसका परिवार भी है। उसकी बेटी माहरुख जिसे उसका उत्तराधिकारी माना जा रहा है। उसका बेटा मोइन, उसकी दो और बेटियां बेगम और महजबीन। दाऊद का कुनबा पाकिस्तान से लेकर दुबई तक फैला हुआ है, लेकिन दाऊद का एक कुनबा हिंदुस्तान में भी है। ये वो लोग हैं, जो मुंबई के डोंगरी के करीब स्थित एक बड़े कब्रिस्तान में दफन हैं। दाऊद की मां की तीन कसमों की अहमियत इस कब्रिस्तान से समझी जा सकती है क्योंकि दाऊद की मां अमीना बी यहीं दफनाई गईं। जानकारों का कहना है कि दाऊद इब्राहिम अपनी मां अमीना बी के करीब ही दफन होना चाहता है। हालांकि, इसकी गुंजाइश कम ही है, क्योंकि दाऊद इब्राहिम भारत का मोस्ट वांटेड अपराधी है। वो अंडरवल्र्ड की काली दुनिया का बेताज बादशाह है और अगर भारत के हाथ आ गया तो उसकी कोई भी मर्जी नहीं चलने वाली। बताया जा रहा है कि दाऊद इब्राहिम के कुनबे ने ३० साल पहले से ही डोंगरी के इस बड़े कब्रिस्तान में अपने सदस्यों की कब्र बुक करवा ली थी। ये भी बताया गया है कि दाऊद के कुनबे ने उस वक्त अपने लोगों के लिए दो गज जमीन की बुकिंग की खातिर ५ हजार रुपये पेशगी जमा भी करवा दिए थे। कहा जाता है कि ये पेशगी रकम १९८२ में दी गई थी और तब से लेकर आजतक दाऊद के कुनबे की कब्र की बुकिंग बरकरार रखने के लिए हर साल एक रकम भी चुकाई जाती है। ताकि इस कुनबे के दफन लोगों का खास ध्यान रखा जाए। बताया जाता है कि इसी कब्रिस्तान में दाऊद की मां अमीना बी दफनाई गईं। इसी कब्रिस्तान में दाऊद के पिता इब्राहिम भी दफन हैं। दाऊद का भाई शब्बीर जिसे १९८१ में मुंबई के पठान गैंग ने मार दिया था, उसे भी यहीं जगह दी गई। दाऊद के बहनोई इब्राहिम पारकर भी यहीं दफनाए गए। दिलचस्प बात ये है कि इस कुनबे की हसरत ये भी थी कि दाऊद के छोटे भाई नूरा को भी यहीं दफनाया जाए, नूरा की २००९ में पाकिस्तान में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी, लेकिन उसे कराची में ही गुमनाम जगह दो गज जमीन मिली। दाऊद का भी यही अंजाम होगा। क्योंकि उसकी मौजूदगी को पाकिस्तान हमेशा ही नकारता रहा है, सो उसकी मौत को भी नकारा ही जाएगा। वो पाकिस्तान में है और अगर वहीं मारा गया तो उसे भी गुमनाम मौत ही मिलेगी। और शायद इसीलिए कहा जाता है कि दाऊद कभी मरेगा नहीं, मर भी गया तो डी कंपनी उसका नाम हमेशा जिंदा रखना चाहेगी।