भारत की एक और सफलता : आईआरएनएसएस-1ई की सफल लॉन्चिंग


नेविगेशन का पांचवां सेटेलाइट भी कक्षा में स्थापित
श्रीहरिकोटा। इसरो ने देसी जीपीएस सिस्टम की तरफ एक बड़ा कदम बढ़ा लिया है। बुधवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष वेंâद्र से अपने पांचवें नेविगेशन सैटेलाइट आईआरएनएसएस-१ई का सफलता पूर्वक प्रक्षेपण कर दिया है। आईआरएनएसएस-१ई नाम की यह सैटेलाइट भारत के नेविगेशन सिस्टम को खड़ा करने में अहम मानी जा रही है। ४४.४ मीटर की ऊंचाई और १४२५ किलोग्राम के इस उपग्रह पर १४०० करोड़ का ़खर्च आया है और इसके दस साल तक काम करने की उम्मीद है। यह इस साल इसरो का पहला रॉकेट प्रक्षेपण हैं।
श्रीहरिकोटा से आज सुबह ९:३१ बजे `आईआरएनएसएस-१ई’ का प्रक्षेपण किया गया। `आईआरएनएसएस-१ई’ आईआरएनएसएस अंतरिक्ष प्रणाली के सात उपग्रहों में से पांचवां नेविगेशन उपग्रह है। अंतरिक्ष यान के पूर्ण संपूरक के प्रक्षेपित हो जाने के बाद यह अमेरिकी जीपीएस के समतुल्य होगा। `आईआरएनएसएस-१ई’ का विन्यास इसके पूर्ववर्ती आईआरएनएसएस-१ए, १बी, १सी और १डी के बराबर है। आईआरएनएसएस-१ई भारत की आईआरएनएसएस अंतरिक्ष प्रणाली के लिए प्रक्षेपित किए जाने वाले सात उपग्रहों में से पांचवा उपग्रह है। पांचवें दिशासूचक उपग्रह आईआरएनएसएस-१ई को ले जा रहे भारत के पीएसएलवी-सी३१ रॉकेट ने श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी।
आईआरएनएसएस-१ई’ अपने साथ दो तरह के पेलोड (अंतरिक्ष उपकरण) लेकर गया है जिसमें एक नेविगेशन जबकि दूसरा रेंिंजग पेलोड है । नेविगेशिन पेलोड यूजरों को नेविगेशन सेवा से जुड़े सिग्नल भेजेगा और यह `एल-५’ एवं `एस’ बैंड में काम करेगा । रेिंजग पेलोड में `सी’ बैंड का एक ट्रांसपोंडर लगा होगा जिससे उपग्रह की रेंज के बारे में सटीक जानकारी मिल सकेगी। `आईआरएनएसएस-१ई’ लेजर के जरिए रेंज का पता लगाने के लिए अपने साथ कॉर्नर क्यूब रेट्रो रिफ्लेक्टर्स भी लेकर गया है। इस सिस्टम की भारतीय सेनाओं को काफी जरूरत है, लेकिन आम लोगों को भी फायदा होगा।