‘भारतरत्न’ से नवाजे गए अटल, मोदी बोले- वाजपेयी करोड़ दिल की प्रेरणा


० राष्ट्रपति ने खुद घर जाकर दिया सम्मान
० मदन मोहन मालवीय का सम्मान ३१ को
नईदिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया। वाजपेयी स्वास्थ्य को देखते हुए राष्ट्रपति खुद उनके घर जाकर अवार्ड उन्हें प्रदान किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली, केन्द्रीय परिवहन नितिन गडकरी और केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ िंसह भी वाजपेयी के घर मौजूद रहे। ३१ मार्च को महामना मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न प्रदान किया जाएगा। सम्मान मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से कहा कि मेरे जैसे करोड़ों देशवासियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है, वह सभी के लिये प्रेरणा के स्त्रोत है।
० वाजपेयी को बधाइयों का तांता
वाजपेयी प्रधानमंत्री के पद पर रहे हों या नेता प्रतिपक्ष.. बेशक देश की बात हो या क्रााqन्तकारियों की, या फिर उनकी अपनी ही कविताओं की। अटल बिहारी वाजपेयी की बरारबरी कोई नहीं कर सकता। भारत रत्न से उन्हें सम्मानित किए जाने की घोषणा पिछले वर्ष कर दी गई थी, अब आज यानी २७ मार्च को उन्हें यह रत्न दे दिया जाएगा। ऐसे महान अवसर पर आइए उनके जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों पर नजर डालते हैं।
० बधाई संदेश
मेरे जैसे करोड़ों देशवासियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है, जब अटल जी को भारत रत्न दिया जा रहा है।
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
अटल जी को भारत रत्न दिया जा ना, सिर्पâ राजनीतिक र्पािटयों के लिए ही नहीं बाqल्क देश के सभी नागरिकों के लिए महान गौरव का क्षण है।
राजनाथ िंसह,गृहमंत्री
बहुत खुशी की बात है कि अटल जी आज भारत रत्न से सम्मानित किया जा रहा है। वो बड़े पैमाने पर इस सम्मान के हकदार हैं, जो वास्तव में एक महान राजनेता। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हूं…
ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, प.बंगाल

आदरणीय अटल जी को ‘भारत रत्न’ की बहुत-बहुत बधाई। देश के सर्वोच्च अधिकारी माननीय राष्ट्रपति द्वारा स्वयं जा कर यह पुरस्कार देना शुभ संकेत है। कुछ अपवादों के आगे कोई भी प्रोटोकॉल मायने नहीं रखता।
कुमार विश्वास, आप नेता

अटल इरादे, स्वाभिमानी, कुशल वक्ता, दूरद्रष्टा, लोकप्रिय नेता-बहुमुखी प्रतिभा के धनी माननीय अटल जी ने हर क्षेत्र में उच्च आदर्श प्रस्तुत किये हैं।
पीयूष गोयल, वेंâद्रीय राज्यमंत्री
जिन अटल जी ने मेरे जैसे करोड़ों कार्यकर्ताओं को गढ़ा, राष्ट्रवाद के रास्ते पर चलना सिखाया ऐसे ‘भारत रत्न’ हैं अटल जी …..हमें गर्व हैं ।
मुख्तार अब्बास नकवी, भाजपा नेता

– अटल को अब तक के पुरस्कार
वर्ष १९९२: पद्म विभूषण
वर्ष १९९३: डी लिट (कानपुर विश्वविद्यालय)
वर्ष १९९४: लोकमान्य तिलक पुरस्कार
वर्ष १९९४: श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार
वर्ष १९९४: भारत रत्न पंडित गोिंवद वल्लभ पंत पुरस्कार
वर्ष २०१४-१५: दिसम्बर में भारत रत्न से सम्मानित

० सव्यंसेवक से प्रधानमंत्री तक का सफर
२५ दिसम्बर १९२४ को जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी ने बीए की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने। कानपुर के डीएवी कालेज से राजनीति शास्त्र में एमए की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई शुरू की। एलएलबी बीच में ही छोड़कर वे संघ के कार्य में जुट गए। वह भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक हैं। वर्ष १९६८ से १९७३ तक वह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्ष १९५५ में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और वर्ष १९५७ में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुंचे। वर्ष १९५७ से १९७७ तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे २० वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में वर्ष १९७७ से १९७९ तक विदेश मंत्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनायी। वर्ष १९८० में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर उन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। ६ अप्रैल १९८० में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया। दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में १३ दलों की गठबन्धन सरकार ने पांच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम है।