बड़ी रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को लताड़ा


नई दिल्ली । देश के सर्वोच्च न्यायालय ने असम की कांग्रेस सरकार पर सख्त टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री की करीब ५०० करोड़ रुपये की कल्याणकारी योजना पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। गौर हो कि प्रदेश में मई में चुनाव होने हैं। ऐसे में अदालत ने राज्य मे चुनाव से पहले शुरू की गई योजनाओं पर सवाल उठाया है। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीस टीएस ठाकुर की बेंच ने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रशासनिक आदेशों के तहत इस तरह जनता के सैंकडों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि लगता है कि ये योजनाएं चुनाव को ध्यान में रखते हुए ही शुरू की गई हैं। सरकार की डयूटी है कि वह ऐसी योजनाओं से पहले ऐसी पारदर्शी प्रक्रिया लाएं, जिससे कल्याणकारी योजनाओं का लाभ गरीब से गरीब लोगों तक भी पहुंच सके।
कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश कपिल सिब्बल की इस बात पर भी ऐतराज जताया कि ऐसा कोई वैज्ञानिक तरीका नहीं है, जिससे पता लगाया जा सके कि किन लोगों को जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को जरूरतमंद लोगों का पता लगाना ही होगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें असम में मुख्यमंत्री की विशेष कल्याण योजना पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि ये योजना भ्रष्टाचार और सत्तारूढ़ पार्टी के अपने नजदीकी लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए है। इससे पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट ने योजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। यह योजना अगस्त २०१५ में शुरू की गई है और इसके तहत राज्य में विधवाओं, महिला स्वयंसेवी समूहों, पेंशनधारी और बेघर लोगों को र्आिथक सहायता दी जाती है।