ब्रिटेन ने खोला ‘डिजायनर बेबी’ के लिए रास्ता


नई दिल्ली । ब्रिटेन ने ‘डिजायनर बेबी’ की राह आसान बना दी है। इसका कारण यह है कि ब्रिटेन के विज्ञानियों को मानव भ्रूण पर अनुसंधान की अनुमति दी गई है। इससे पहले चीनी विज्ञानियों ने एक वर्ष पूर्व यह घोषणा करके हलचल मचा दी थी कि उन्होंने जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) मानव भ्रूण तैयार कर लिए हैं। उसी तकनीक पर ब्रिटिश विज्ञानियों को अनुमति मिली और अब संभावना बढ़ गई है कि निकट भविष्य ‘जीएम बेबी’ या ‘डिजायनर बेबी’ की कल्पना साकार रूप ले सकती है। लंदन के प्रâांसिस क्रिक इंस्टीटयूट की स्टेम सेल विज्ञानी वैâथी नियाकन व उनकी टीम के अनुसंधान के अनुरोध को ब्रिटिश संस्था एचएफईए (द ह्यूमन र्फिटलाइजेशन एंड एंब्रियोलोजी अथॉरिटी) ने मंजूरी दे दी है। विज्ञानी मानवीय भ्रूण पर जीन एडििंटग तकनीक से शोध करेंगे। यह जेनेटिकली मोडिफाइड तरीके का ही समरूप है। नियाकन की ओर से बताया गया कि अभी भ्रूण बनने के आरंभिक सात दिनों तक िंसगल सेल से लेकर २५० सेल पर शोध होगा। नियाकन की योजना सीआरआइएसपीआर-कास ९ तकनीक पर आधारित है जिससे डिजायर बेबी तैयार किया जा सकता है, यानी जैसा चाहेंगे बच्चा वैसा ही पैदा होगा। कहा जा रहा है कि यह तकनीक विज्ञानियों को भ्रूण की जेनेटिक गड़बडियों को दूर करने या बदलने में मददगार है लेकिन दूसरा पक्ष भी है।
ब्रिटेन के ह्यूमन जेनेटिक अलर्ट अभियान के निदेशक डेविड िंकग ने नियाकन की योजना को जीएम बेबी को वैध रूप देने का प्रयास बताया है। कई अन्य संस्थाओं ने भी तेवर तीखे कर लिए हैं। नियाकन का कहना है कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं कि भ्रूण के जीन से छेड़छाड़ की जाए, मेरा तो यही उद्देश्य है कि मानव भ्रूण का अनुवूâल परिाqस्थतियों में विकास हो। शोध से भविष्य में प्रजनन अक्षमता का सही निदान करना संभव होगा।