बाबरी केस सुनवाई आज, भाजपा में बढ़ी बेचैनी


० वेंâद्र में भाजपा सरकार के मद्देनजर सीबीआई की निष्पक्षता पर आशंका
नईदिल्ली। बाबरी माqस्जद ढहाए जाने के बाद इसकी साजिश से जुड़े २२ साल पुराने केस को लेकर भाजपा में जबर्दस्त मंथन चल रहा है। सीबीआई की स्पेशल लीव पिटिशन में इलाहाबाद हाई कोर्ट के २० मई २०१० के उस पैâसले को चुनौती दी गई है, जिसमें भाजपा और संघ परिवार के सीनियर नेताओं को बाबरी माqस्जद तोड़ने की साजिश में शामिल होने के आरोप से बरी कर दिया गया था। इस स्पेशल लीव पिटिशन पर मंगलवार को सुनवाई होगी। भाजपा के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और सीनियर नेता अरुण जेटली ‘फ्यूचर प्लान’ पर चर्चा के लिए प्रमुख अभियुक्तों लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से मुलाकात कर रहे हैं। माना जा रहा है शाह की ६ मार्च को आरएसएस के शीर्ष नेताओं मोहन भागवत और भैयाजी जोशी के साथ हुई मुलाकात में भी इस मसले पर चर्चा हुई थी। इस मामले के आरोपियों में कल्याण िंसह, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, विनय कटियार और अशोक िंसघल शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट में एक और स्पेशल लीव पिटिशन को स्वीकार किया गया है, जिस पर मंगलवार को सीबीआई की याचिका के साथ सुनवाई होगी। इसमें वेंâद्र में भाजपा की सरकार होने के मद्देनजर इस केस में सीबीआई की निष्पक्षता को लेकर आशंका जताई गई है। यह पिटिशन पैâजाबाद के निवासी हाजी मोहम्मद अहमद की तरफ से दायर की गई है, जो रामजन्मभूमि विवाद केस से पिछले ४५ साल से जुड़े हैं। याचिकाकर्ताओं ने अपनी आशंकाओं की वजहों के बारे में कहा है, ‘अहम बात यह है कि जिन पर क्रिमिनल ट्रायल चला है, वह वैâबिनेट मिनिस्टर उमा भारती हैं और जिस नेता के खिलाफ गड़बड़ियों को दुरुस्त करने के लिए सही कार्रवाई नहीं करने का आरोप है, वह राजनाथ िंसह वेंâद्रीय वैâबिनेट में काफी ऊंचे ओहदे पर हैं। वही एक अन्य अभियुक्त कल्याण सिंह किसी राज्य के गवर्नर बन चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट में जिस मामले की सुनवाई होनी है, वह सीबीआई की ९ फरवरी २०११ को दायर एसएलपी से जुड़ी है। इलाहाबाद कोर्ट ने बाबरी माqस्जद गिराने के मामले में २१ आरोपियों को साजिश के आरोप से मुक्त कर दिया था। सीबीआई ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह पैâसला २० मई २०१२ को आया था, लेकिन सीबीआई ने ८ महीने बाद इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। कानूनन अपील तीन महीने के अंदर दाखिल होनी चाहिए। इस मामले में यह मियाद २९ अगस्त २०१० को खत्म हो गई थी।
अब तक आरोपी सीबीआई की अपील में देरी की दुहाई देकर याचिका खारिज करने की मांग करते आए हैं। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह इस मामले में ‘बहुत सावधानी’ के साथ कदम बढ़ाना चाहती थी। इसी वजह से देरी हुई। सीबीआई ने पहले कहा था, देरी इसलिए हुई क्योंकि जितने भी पक्ष मामले से जुड़े थे, वे एहतियात बरत रहे थे। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हम कोई चूक नहीं चाहते थे। इसलिए बहुत सावधानी के साथ काम किया गया।