प्रधानमंत्री ने पानी को ‘पारस’ बताते हुए बूंद सिंचाई पर दिया बल


मुंबई । कृषि कार्य आधारित परिश्रम के उचित प्रतिसाद के लिए किसानों से परस्पर संवाद को आवश्यक बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे तकनीक के साथ जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। शनिवार को महाराष्ट्र के बारामती में कृषि विज्ञान वेंâद्र में सब्जी उत्पादन के लिए उत्कृष्टता के वेंâद्र के उद्घाटन के मौके पर बोलते हुए मोदी ने कहा कि किसानों का सपना अभी पूरा नहीं हुआ है, इसके लिए उन्हें सुनहरे अवसर प्रदान किए जाने की जरूरत है।साथ ही उन्होंने चीनी उद्योग के विकास पर काम करने के साथ इसके लिए वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि कौशल विकास के लिए स्वूâलों में अलग से प्रोग्राम चलाए जाने चाहिए। १०वीं, ११वीं और १२वीं के छात्रों को मिट्टी जांच की ट्रेिंनग देने की आश्वयकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें कृषि को आधुनिकता की ओर ले जाना है। देश में िंसचाई में पानी बहुत ज्यादा बर्बाद होता है। जिसे बचाने के लिए हमें बूंद िंसचाई तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पानी एक ऐसा ‘पारस’ है जो धरती से सोना पैदा कर सकता है। उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार के योगदान का उल्लेख करते हुए भिन्न विचारधारा के बीच राष्ट्र का विकास में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।