पीएफ पर नहीं लगेगा किसी प्रकार का टैक्स


-वेंâद्रीय वित्तमंत्री के घोषित पीएफ टैक्स को करमुक्त करने का निर्णय नई दिल्ली(ईएमएस)। वेंâद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की सोमवार को घोषित बजट में पीएफ को टैक्स के दायरे में लाने की घोषणा से आलोचना झेल रही वेंâद्र सरकार अब डैमेज वंâट्रोल मोड में दिख रही है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि पीएफ पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगाया जाएगा। जबकि जेटली ने घोषणा की थी कि कोई भी व्यक्ति के यदि अपने पीएफ से ४० फीसदी धनराशि निकालता है तो उसे टैक्स नहीं देना पड़ेगा, यानी बाकी ६० फीसदी रकम पर टैक्स लगेगा। मौजूदा नियम के मुताबिक ईपीएफ पूरी तरह टैक्स प्रâी है, लेकिन नए बजट में इसे टैक्स के दायरे में लाने के सरकार के पैâसले ने विरोध को हवा दे दी। अलग-अलग क्षेत्रों के कर्मचारियों ने इस पैâसले को एंटी-वर्वâर बताया। विरोध के बाद सरकार ने पहले साफ किया कि हर महीने १५००० तक की सैलरी वालों को ईपीएफ निकासी में टैक्स से छूट दी गई थी हालांकि अब सरकार सभी के लिए ईपीएफ को टैक्स प्रâी बनाने के संकेत दे रही है। सरकार ने मंगलवार को कहा था कि ६० फीसदी राशि पर मिलने वाले ब्याज की निकासी एक अप्रैल से लगने वाले टैक्स के नियम में बदलाव करेगी।

ईपीएफ पर कर प्रस्ताव को लेकर सरकार नरम, बदलाव पर करेगी विचार
नई दिल्ली। चौतरफा आलोचनाओं के बीच सरकार ने भविष्य निधि से निकासी पर कर लगाने के बजट प्रस्ताव को आंशिक रूप से वापस लेने पर विचार करने का वादा किया है। वित्त वर्ष २०१६-१७ के बजट में एक अप्रैल के बाद भविष्य निधि में किए जाने वाले अंशदान में से निकासी के समय कर्मचारियों के योगदान के ६० फीसदी पर कर लगाए जाने के प्रस्ताव के एक दिन बाद विभिन्न तबकों की आलोचनाओं के बीच सरकार ने जोर देकर कहा कि इस कदम का मकसद उच्च वेतन पाने वाले लोग हैं और ३.७ करोड़ ईपीएफ सदस्यों में इनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं है। इस संदर्भ में एक-दो स्पष्टीकरण आए। इसमें से एक में कहा है कि सरकार केवल ब्याज पर कर लगाएगी और मूल राशि के निकासी पर नहीं। बाद में एक प्रेस नोट जारी किया गया है कि वह केवल संचयी ब्याज पर कर लगाने की मांग पर विचार कर रही है। वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने बाद में कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का वेतन सांविधिक सीमा १५,००० रु मासिक से कम है, उन पर इसका असर नहीं पड़ेगा। सिन्हा ने कहा कि चूंकि कई लोगों ने इसको लेकर विरोध जताया है, हम इस पर गौर कर रहे हैं। निर्णय का इंतजार कीजिए। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने भी कहा कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय से पहले केवल ब्याज पर कर लगाने की मांग पर विचार किया जाएगा। इससे पहले, दिन में अधिया ने कहा था कि ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) में एक अप्रैल २०१६ के बाद के योगदान पर मिलने वाले ब्याज के ६० फीसदी पर ही कर लगेगा और निकासी के समय मूल राशि पर कोई कर नहीं लगेगा।
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार नए कर प्रस्ताव का मकसद केवल उच्च वेतन पाने वालों पर कर लगाना है और इनकी संख्या कर्मचारी भविष्य निधि के कुल ३.७ करोड़ अंशधारकों में से केवल ७० लाख है। करीब ३.० करोड़ व्यक्तियों की सांविधिक वेतन सीमा १५,००० रुपए प्रति महीने के दायरे में आती हैं, अत: प्रस्तावित बदलाव से उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वर्ष २०१६-१७ का बजट पेश करते हुए कहा कि इस साल एक अप्रैल के बाद भविष्य निधि में किए जाने वाले अंशदान में से निकासी के समय कर्मचारियों के योगदान के ६० फीसदी पर कर लागू होगा। यह प्रावधान सेवानिवृत्ति कोषों और ईपीएफ जैसे मान्यता प्राप्त भविष्य निधि कोषों पर लागू होगा। उन्होंने मान्यता प्राप्त पीएफ तथा सेवानिवृत्ति कोष में कर लाभ के लिए नियोक्ताओं के अंशदान पर सालाना १.५ लाख रुपए की मौद्रिक सीमा लगाने का भी प्रस्ताव किया। इस प्रस्ताव का आरएसएस समर्थित बीएमएस समेत विभिन्न कर्मचारी संगठनों तथा राजनीति दलों ने तीखी आलोचना की है और इसे कामकाजी वर्ग पर एक हमला कहा और इसे दोहरा कराधान का स्पष्ट मामला बताया। मंत्रालय ने कहा कि हमें विभिन्न तबकों से सुझाव मिला है, जिसमें कहा गया है कि अगर कोष का ६० फीसदी सेवानिवृत्ति उत्पादों में निवेश नहीं किया जाता है तो कर केवल संचयी रिटर्न पर लगाया जाना चाहिए और न कि अंशदान की राशि पर। वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, हमें यह भी सुझाव मिले हैं कि ईपीएफ के तहत नियोक्ताओं के योगदान पर कोई मौद्रिक सीमा नहीं लगाई जानी चाहिए क्योंकि एनपीएस में ऐसी कोई सीमा नहीं है। वित्त मंत्री इन सभी सुझावों पर विचार करेंगे और इस पर उपयुक्त समय में निणNय करेंगे। मंत्रालय ने कहा कि इस सुधार का मकसद कर व्यवस्था में बदलाव लाना है ताकि निजी क्षेत्र के ज्यादा-से-ज्यादा कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद भविष्य निधि से पूरी राशि निकालने के बजाए पेंशन सुरक्षा की ओर अग्रसर हों। इसके लिए सरकार ने घोषणा की है कि सेवानिवृत्ति के समय कुल कोष में से ४० फीसदी निकासी पर कोई कर नहीं लगेगा और यह मान्यता प्राप्त भविष्य निधि और एनपीएस दोनों पर लागू होगा।
झा/देवेन्द्र/ईएमएस/०२मार्च/२०१६