पाक सैन्य प्रमुख राहील को थी पठानकोट आतंकी हमले की पूर्व सूचना


नईदिल्ली। पठानकोट में हुए आतंकी हमले के बारे में पता चला है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख के राहील शरीफ को पहले ही हमला संबंधी जानकारी थी। भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के शांति वार्ता के प्रयासों से पूरी तरह सहमत नहीं है।
हाल ही में हुई एक बैठक में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ ने नवाज को कहा था कि वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन पाकिस्तानी सेना देश में मौजूद आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी। ये संगठन भारत के खिलाफ मुहिम छेड़े हुए हैं। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, आईएसआई दिसंबर २०१४ से आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मत की ताकत बढ़ाने में जुटी है। बीते कुछ सालों में जैश-ए-मुहम्मद के कुछ लोग लश्कर-ए-जांघवी नाम के आतंकी संगठन से जुड़ गए जो कि पाकिस्तान को ही निशाना बना रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जैश-ए-मुहम्मद को पाकिस्तानी सेना का समर्थन मिलने का सीधा मतलब से है कि भारत के खिलाफ आतंकवाद जारी रखना और पाकिस्तान के अंदर हो रहे हमलों को रोकना।
लश्कर-ए-जांघवी एक सुन्नी बहुल और जिहादी आतंकी संगठन है जो पाकिस्तान में सक्रिय है। इस संगठन ने पाकिस्तान में शिया मुाqस्लमों को निशाना बनाते हुए कई बड़े हमलों को अंजाम दिया है जिनमें साल २०१३ में २०० शियाओं की हत्या का मामला भी शामिल है। इसके अलावा १९९८ में मोमिनपुरा कब्रिस्तान में हुए हमले के अलावा २००९ में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम को निशाना बनाकर किए गए हमले में भी इस आतंकी संगठन का नाम सामने आया था। बीते सालों में यह संगठन पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरा है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि सीमा पार से आने वाले आतंकियों को आईएसआई से ट्रेिंनग मिलती है और उन्हें २६/११ जैसे हमलों में कमांडो ऑपरेशन से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है। पठानकोट हमले के बाद भारत सरकार ने अब तक पाकिस्तान विदेश सचिव स्तर की बातचीत जारी रखने को लेकर रुख पूरी तरह साफ नहीं किया है। यह बैठक १५ जनवरी को इस्लामाबाद में होनी है।