पाकिस्तान की प्राथमिकता में नहीं रहा कश्मीर


नई दिल्ली । पाकिस्तान भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब भी कश्मीर का राग अलापता रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि कश्मीर उसकी प्राथमिकता सूची में काफी पीछे छूट गया है। इसका उदाहरण पाकिस्तान के नेशनल असेंबली की विशेष कश्मीर कमेटी है। पिछले दो साल से इस विशेष कमेटी की एक भी बैठक नहीं हुई है। इस विशेष कमेटी का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि इसके अध्यक्ष को वेंâद्रीय मंत्री का दर्जा दिया गया है। विशेष कमेटी का गठन कश्मीर के लोगों पर भारतीय सुरक्षा बलों की कथित ज्यादतियों को दुनिया के विभिन्न फोरम पर उठाने और कश्मीरी में जनमत संग्र्रह के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए किया गया।
कश्मीरियों के प्रति पूरे पाकिस्तान के समर्थन का इजहार करने के लिए इसमें सभी प्रांतों और दलों के चुने हुए प्रतिनिधियों को जगह दी जाती है। कमेटी के लोग गुलाम कश्मीर जाकर लोगों को अपने समर्थन का इजहार करते हैं। लेकिन हालत यह है कि पिछले कई वर्षों से विशेष कमेटी की न तो कोई बैठक हुई है और न ही इसने गुलाम कश्मीर का दौरा किया है। कश्मीर से संबंधित विशेष कमेटी के सदस्यों का चुनाव २१ अगस्त २०१३ को किया गया था। मौलाना फजलुर रहमान इसके अध्यक्ष चुने गए थे। भारत के साथ संबंधों को सुधारने में पाकिस्तान कश्मीर को अहम मुद्दा बताता आया है। पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पूर्व पाक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज कई बार कह चुके हैं कि कश्मीर समस्या को हल किए बिना भारत के साथ संबंध सामान्य नहीं हो सकते हैं। इस साल अगस्त में एनएसए स्तर की बातचीत पाकिस्तान की इसी जिद के कारण रद हो गई थी। लेकिन कश्मीर कमेटी की बैठक नहीं होने का हवाला देते हुए पाकिस्तान के भीतर भी कई लोग इस जिद पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।