पटना विधान परिषद में मनोनीत सभी 12 सदस्यों को नोटिस


पटना. पटना कोर्ट ने विधान परिषद में मनोनीत किए गए सभी १२ सदस्यों को नोटिस जारी कर जानना चाहा है कि किस आधार पर उन्हें यह सदस्यता दी गयी है, उन्हें उनकी पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी देने को भी कहा गया है.
एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह पैâसला दिया. एनजीओ का कहना है कि विधान परिषद के सस्दयों की नियुक्ति के दौरान संवैधानिक प्रावधानों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है.
राजनीतिक दल ‘नॉमिनेटेड’ वैâटेगरी का इस्तेमाल अपनी मर्जी से करते रहे हैं. स्थापित संवैधानिक प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए राजनीतिक दल नॉमिनेटेड वैâटेगरी की मदद से उन नेताओं को फायदा पहुंचाने की कोशिश करते हैं जो विधानसभा में अपनी पहुंच नहीं बना पाते हैं. ऐसे नेता या तो चुनाव लड़ना चाहते हैं या फिर चुनाव लड़कर हार चुके होते हैं.
पटना कोर्ट के नोटिस के बाद इस प्रक्रिया पर दूरगामी असर पड़ सकता है. पटना हाईकोर्ट ने बिहार विधान परिषद के १२ नॉमिनेटेड सदस्यों को नोटिस दिया है. नोटिस में कोर्ट ने यह पूछा कि किस क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता के आधार पर उन्हें विधानपरिषद में मनोनीत किया गया.
कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न विधान पार्षदों की सदस्यता निलंबित कर दी जाए. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने विधान पार्षदों की पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी भी मांगी है. इन सदस्यों में नीतीश कुमार के मौजूदा वैâबिनेट में शामिल सदस्य राजीव रंजन िंसह भी है जिन्हें सामाजिक कार्यों की पृष्ठभूमि के तहत विधान परिषद भेजा गया है.