पंजाब-हरियाणा में पानी पर `पानीपत’


चंडीगढ़.  पंजाब में अकाली दल और हरियाणा में भाजपा पानी को लेकर आमने-सामने हैं. कहा जा रहा है कि मनोहरलाल खट्टर ने पानी को लेकर प्रकाश िंसह बादल के सामने कोई भी समझौता न करने की कसम खा ली है. चुनाव सामने हैं सतलज यमुना नहर के निर्माण को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश िंसह बादल ने कहा कि है वह पंजाब से एक बूंद पानी भी बाहर नहीं जाने देंगे. वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि हरियाणा का बड़ा भाई होने की वजह से पंजाब को छोटे भाई के हितों की रक्षा करनी चाहिए. खट्टर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हरियाण को उसके हिस्से का हर बूंद पानी मिलेगा.
दोनों राज्यों के बीच का टकराव नरेंद्र मोदी सरकार के लिए भी परेशानी का सबब है क्योंकि दोनों ही राज्यों में भाजपा सरकार में है.
हालिया विवाद की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट में प्रेसिडेंशियल रेफरेंस ऑन द पंजाब र्टिमनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स एक्ट २००४ की सुनवाई शुरू होने से जुड़ा है. कानून को पंजाब की पूर्व कांग्रेस सरकार ने बनाया था जिसके तहत पड़ोसी राज्यों के साथ पंजाब के पानी साझेदाी समझौते को रद्द किया जाना है.
विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम होने का समय होने की वजह से कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल तीनों ने अपने अपने फायदे के मुताबिक इस मुद्दे को उछालना शुरू कर दिया है. तीनों दल एक दूसरे पर राज्य के हितों को लेकर समझौता करने का आरोप लगा रहे हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री अमिंरदर िंसह ने मौजूदा मुख्यमंत्री प्रकाश िंसह बादल से इस मामले पर अपनी ाqस्थति स्पष्ट करने को कहा है. इसके बाद आम आदमी पार्टी ने मामले में पड़ते हुए बादल से उनकी बहू हरसिमरत कौर को इस्तीफा देने के लिए कहा क्योंकि वह मोदी सरकार में मंत्री हैं.