नेहरू ने नेताजी का खजाना लूटने वाले का किया था सम्मान!


– महत्वपूर्ण फाइलें सार्वजनिक होने के बाद लेखक अनुज धर के दावे पर लगी मुहर
नई दिल्ली। हाल ही में नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलें सार्वजनिक होने के बाद लेखक अनुज धर के उस दावे पर मुहर लग गई है कि जिसमें उन्होंने दावा किया था कि नेताजी के खजाने को लूट लिया गया था। लेकिन नेहरू सरकार ने इनसे इस मामले में पूछताछ करने की बजाय इन दोनों में से एक कर्मी को अपनी सरकार में पांच सरकार साल के लिए पाqब्लसिटी एडवाइजर के तौर पर नियुक्त कर दिया। पिछले दिनों वेंâद्र सरकार द्वारा नेताजी से जुड़े कुछ अहम दस्तावेजों में एक अहम फाइल अनुज धर के दावे को सही ठहराती है, जिसमें कहा गया है कि नेताजी और उनके सहयोगी रास बिहारी बोस द्वारा बनाई गई भारतीय राष्ट्रीय सेना के खजाने को लूटा गया था। फाइल में साल १९५१ से १९५५ के दौरान भारत और टोक्यो के बीच बातचीत का ब्यौरा दिया गया है, जिससे साफ होता है कि नेहरू सरकार नेताजी के खजाने की इस लूट के बारे में जानती थी लेकिन लगता है कि वो इस मामले को दूसरी तरह देखना चाहती थी।
अनुमान लगाया गया है कि नेताजी के इस खजाने की कीमत उस वक्त करीब ७ लाख डॉलर थी। लेखक अनुज धर ने साल २०१२ में अपनी किताब इंडियाज बिगेस्ट कवर अप के जरिए इस खजाना घोटाले का खुलासा किया था। फाइल के मुताबिक २१ मई १९५१ को टोक्यो मिशन प्रमुख के.के. चेत्तूर ने कॉमनवेल्थ सीव्रेâट सैकेट्री बी एन चक्रबर्ती को पत्र लिखकर बोस के दो प्रमुख सहयोगी, मंत्री, एस.ए अय्यर और टोक्यो में भारतीय स्वतंत्रता लीग के प्रमुख मंगा रामर्मूित के बारे में संदेह व्यक्त किया था। जैसा कि आप किसी संदेह के बारे में नहीं जानते हैं, रामर्मूित के खिलाफ भारतीय स्वतंत्रता लीग के पैसों के साथ-साथ स्वर्गीय सुभाष चंद्र बोस की संपत्ति सहित हीरे, आभूषण, सोने और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की हेरापेâरी के गंभीर आरोप हैं, सही है अथवा गलत है, लेकिन अय्यर का नाम भी इन आरोपों में सामने आ रहा है।केके चेत्तूर ने २० अक्टूबर १९५१ को लिखा था कि जापान की सरकार ने मिशन को गोपनीय सूचना दी थी कि बोस उनके साथ थे, सोने के गहने और कीमती पत्थर पर्याप्त मात्रा में थे, लेकिन बदकिस्मती से फ्लाइट में केवल दो सूटकेस ले जाने की अनुमति दी गई थी।