नहीं बदली गंगा घाटों की सूरत


हरिद्वार। मकर संक्रांति पर होने वाले अद्र्धवुंâभ के पहले स्नान में सिर्पâ १० दिन शेष हैं, लेकिन गंगा घाटों की हालत अब तक नहीं बदली है। घाटों की टूटी रेिंलग और क्षतिग्रस्त सीढ़ियां दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं। उत्तरी हरिद्वार से लेकर मध्य हरिद्वार तक घाटों का यही हाल है, जबकि प्रशासन ने स्नानों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने का अनुमान लगाया है। वहीं िंसचाई विभाग ने महज कुछ घाटों को सुधार कर जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली है। मेला प्रशासन के अनुसार १४ जनवरी को होने वाले पहले स्नान पर ६० से ७० लाख श्रद्धालु गंगाद्वार में जुट सकते हैं। इसके लिए ऐहतियातन सुरक्षा भी बढ़ाई जा रही है, लेकिन घाटों की टूटी रेिंलग व क्षतिग्रस्त सीढ़ियों की ओर किसी का ध्यान नहीं है। यहां तक कि घाटों पर चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं। यह जानते हुए भी कि बीते चार साल के दौरान हुए हादसों में ६९ लोग जान गंवा चुके हैं। िंसचाई विभाग का हाल देखें तो उसने हरकी पैड़ी के आसपास ाqस्थत घाटों पर तो मरम्मत का कार्य करा दिया, लेकिन उत्तरी हरिद्वार, दूधियाबंद व मध्य हरिद्वार के घाट अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। उत्तरी हरिद्वार में तो २०१३ की आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त घाटों की सुध तक नहीं ली गई। ऐसे में स्नान के दौरान यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही मालूम पड़ती है।