धारा 66-ए पर अड़े चिदंबरम और िंसघवी, कांग्रेस में रार


नईदिल्ली । सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा ६६-ए को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त किए जाने के बाद कांग्रेस नेताओं के बीच ठनाठनी का माहौल बन गया है। पार्टी के दो वकील नेता पी चिदंबरम और अभिषेक मनु िंसघवी इस मुद्दे पर आमने-सामने खड़े हो गए है। संप्रग सरकार में गृह मंत्री रहे चिदंबरम ने ६६ए को निरस्त किए जाने के पीछे संप्रग सरकार द्वारा इस प्रावधान को जल्दबाजी में बनाया गया कमजोर और दुरुपयोग किया जा सकने वाला बताया है। चिदंबरम ने न्यायालय के पैâसले का स्वागत करते हुए कहा कि मैं सर्वोच्च न्यायालय के सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा ६६ए को असंवैधानिक करार देने के पैâसले का स्वागत करता हूं। यह धारा जल्दबाजी में बेहद कमजोर तरीके से लिखी गई थी। यह दुरुपयोग होने के काबिल थी। सचाई यह है कि इसका खूब दुरुपयोग भी हो रहा है।’ उन्होंने कहा कि अगर कही कोई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग करता है तो उससे पूर्व में बने कानूनों के तहत निपटा जा सकता है। इसके लिए कानून में ऐसे प्रावधान की जरूरत नही थी। वहीं काग्रेस ने चिदंबरम के बयान से किनारा किया है।
पार्टी प्रवक्ता और वकील अभिषेक िंसघवी ने कहा कि चिदंबरम ने क्या कहा उसकी उन्हें जानकारी नही है। लेकिन यह संविधान की खूबसूरती है कि कार्यपालिका के बनाए कानून में न्यायपालिका को देखकर, समझकर सुधार करने का पूरा अधिकार है। हम न्यायपालिका के इस निर्णय का स्वागत करते हैं। गौरतलब है कि रद किए गए सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा ६६ए के प्रावधान को संप्रग सरकार २००८ में लेकर आई थी।