दो साल में 35 हजार बार लगी जंगल में आग


नई दिल्ली। उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश की जंगलों में लगी आग ने देश में बहस छेड़ दी है। आंकड़ा भी सामने आया है। जिसमें पता चला है कि दो साल के भीतर ३५ हजार बार जंगलों में आग लगी है। वनों की सुरक्षा नीति, ग्रामीणों से संवाद, माफिया और यहां तक की वनों में मौजूद वृक्षों की प्रजातियों को लेकर बहस चल पड़ी है। जानकारों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं।
जानकारी के अनुसार विशेषज्ञोें का कहना है कि उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश के जंगलों में अधिकांश वृक्ष चीड के हैं। यह बहुउपयोगी तो है ही लेकिन इन्हें काटा नहीं जा पा रहा। दरअसल, कोर्ट का आदेश है कि वन परिक्षेत्र के दस हजार क्षेत्र में कटाई न की जाए। इस कारण यह वृक्ष अत्यधिक लंबे और इसकी पत्ती खतरनाक होती चली गई। अब इसको लेकर देश में बहस चल पड़ी है। देश में जंगलों में लगी आग के आंकड़े केन्द्रीय पर्यावरण एवं जल वायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावेडकर ने राज्यसभा में जारी किए हैं। उन्होंने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह बताया है। भारतीय वन सर्वे ने जंगलों में आग लगने की ३४, ९९१ घटनाओं की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि २०१४ में जंगलों में आग लगने की १९,०५४ घटनाएं दर्ज की गयी जबकि २०१५ में इन घटनाओं में काफी कमी आयी और १५,९३७ घटनाएं दर्ज की गयी। उन्होंने बताया कि वर्ष २०१४ में आग लगने की सर्वाधिक २५३६ घटनाएं असम में हुई जबकि २०१५ में २४६८ घटनाएं मिजोरम में हुई। २०१४ में मिजोरम में २१८९ तथा आंध्र प्रदेश में १९१० घटनाएं हुई। वर्ष २०१५ में असम में १६५६ घटनाएं हुई जबकि उडीसा में १४६७ घटनाएं हुई। दिल्ली, चंडीगढ, पुड्डुचेरी, दमन एवं दीव तथा लक्षद्वीप में आग लगने की एक भी घटना इन दो वर्षो में नहीं हुई ।