देश हित मे क्या कमल और हाथ साथ नहीं आ सकते : मोरारी बापू


नईदिल्ली। राजघाट पर राम कथा के दौरान संत मोरारी बापू ने रविवार को कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी का नाम लिए बगैर कहा कि क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हाथ और कमल दोनों साथ आ जाएं? अगर हाथ में कमल पकड़वा दिया जाए तो हाथ भी रह जाएगा और कमल भी। क्या देश में कभी ऐसी एकता, ऐसी समता नहीं आ सकती, जिसका सपना महात्मा गांधी ने देखा था? उन्होंने जोर देकर कहा कि वह ऐसी बात अगर राजघाट पर नहीं बोलें तो फिर कहां बोलें? राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान का जिक्र करते हुए बापू कह रहे थे कि तुलसी ने करीब पांच सौ साल पहले सरयू घाट पर जरा भी कीचड़ नहीं होने की बात लिख दी थी। दूसरी तरफ, आज तमाम घाट पर कीचड़ ही कीचड़ नजर आती है। कीचड़ में कमल खिल जाए तो चारों तरफ खुशबू पैâल सकती है। लोगों ने तालियां बजाकर उनकी इस बात का स्वागत किया। मोरारी बापू ने किसी मंदिर विशेष का जिक्र न करते हुए कहा कि नारी को पूजा करने से नहीं रोका जा सकता। लोगों में भ्रांति है कि स्त्री हनुमान की पूजा तो बिलकुल नहीं कर सकती। मानस में राक्षसियों ने हनुमान की पूजा की है। जब राक्षसियां पूजा कर सकती हैं तो क्या ाqस्त्रयां पूजा नहीं कर सकतीं? मोरारी बापू ने एक श्रोता के सवाल के जवाब में कहा कि ग्रहों से डरने की कोई जरूरत नहीं है। ग्रह भगवान से बलवान नहीं हैं। लालच या डर के कारण ये भ्रांतियां पैâलाई जा रही हैं। बापू ने कहा कि प्रत्येक शास्त्र अपने समय की परिाqस्थतियों, व्यक्तियों के अनुसार लिखा होता है। सदियों के बाद देशकाल के अनुसार मूल को पकड़े रहते हुए शास्त्रों में संशोधन होते रहना चाहिए। बापू ने कहा कि धर्म कभी बोझिल नहीं हो सकता। जो व्यक्ति को मुस्कुराना सिखा दे, वही धर्म है। आध्यााqत्मक व्यक्ति को हमेशा मुस्कुराते हुए रहना चाहिए। बापू ने व्यास पीठ से हरिबोल के साथ-साथ वाहे गुरु-वाहे गुरु, बुद्धम्? शरणम गच्छामि और अली मौला के नाम का कीर्तन भी करवाया। साथ ही, उन्होंने ये शेर भी पढ़ा- खुदा का जिक्र करें या तुम्हारी बात करें, हमें तो इश्क से मतलब, किसी की बात करें।