देश के 38 फीसदी स्कूलों में शौचालयों का अभाव


रायपुर। देश के लगभग ३८ फीसदी लड़कियों तथा ४० फीसदी लड़कों के विद्यालयों में शौचालयों का अभाव है। भारत के ५४ प्रतिशत विद्यालय बिना बाउंड्री बाल के हैं तथा १४ फीसदी विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। यह खुलासा राष्ट्रीय शिक्षा का अधिकार समिति के सर्वे में किया गया था। जिन विद्यालयों में शौचालयों की व्यवस्था है। वे उनकी साफ सफाई नहीं रख पाते हैं जिसके परिणाम स्वरूप खासतौर पर लड़कियों के स्वूâल छोड़ने की दर बढ़ रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कक्षा दूसरी से नवीं तक की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाने वालों की संख्या २००९ में ११.३ प्रतिशत से बढ़कर २०१४ में १९.५ फीसदी हो गई है। जबकि दूसरी कक्षा से पांचवी कक्षा तक पढ़ाई कर सकने वालों का प्रतिशत २०१२ में ४६.८ प्रतिशत से २०१४ में ४८.१ फीसदी हो गया है। ए एस ई और २०१४ की रिपोर्ट मे बताया गया है कि बिहार, आसाम, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र में पढ़ाई के स्तर में पिछले ५ से ६ वर्षो में गिरावट देखी गई है। सर्वे के अनुसार देश के केवल १० फीसदी स्वूâल आरटीआई के मानदंडों को पूरा करते हैं एवं एक लाख से अधिक स्वूâल में प्रवेश लेने के बाद भी बच्चों के नहीं आने से बंद होने की कगार पर हैं। समुदाय के लोग विद्यालयों में शिक्षकों का अभाव भी एक बड़ी समस्या है। लगभग ८.३२ प्रतिशत विद्यालय केवल एक शिक्षक पर निर्भर हैं।