त्रयंबकेश्वर गर्भगृह में महिलाओं के बाद पुरुषों का भी प्रवेश निषेध


नासिक। त्रयंबेकश्वर मंदिर प्रशासन ने पुरुष एवं महिलाओं के साथ समान आचरण की नीति अपनाते हुए भगवान शिव मंदिर के गर्भगृह में पुरुषों के प्रवेश पर भी सोमवार को रोक लगा दी । यह पैâसला ऐसे समय में आया है जब बंबई उच्च न्यायालय ने मंदिरों में प्रवेश के लिए पुरुषों के साथ महिलाओं को समान अधिकार देने का पैâसला दिया था। न्यासियों में एक ललिता िंशदे ने कहा कि सोमवार सुबह अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश र्उिमला फाल्के जोशी की अध्यक्षता में त्रियंबेकश्वर देवस्थानम न्यास की बोर्ड की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में सचिव एन एम नागरे, न्यास के सदस्य वैâलाश घुले, यादवराव तुंगर, श्रीकांत गैधानी और सिंचद्र पाचोरकर ने हिस्सा लिया। िंशदे ने कहा, कि पुरुषों और महिलाओं के साथ समान बर्ताव के लिए यह पैâसला किया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब एक दिन पहले ही भूमाता रणरागिनी बिग्रेड की तृाqप्त देसाई और २५ अन्य महिला कार्यकर्ताओं को अहमदनगर के िंशगणापुर गांव में प्रसिद्ध शनि मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने से रोकने के लिए एहतियातन हिरासत में लिया गया था।
नासिक से करीब ३० किलोमीटर दूर त्रयंबकेश्वर मंदिर देश में भगवान शिव के महत्वपूर्ण पावन स्थलों में है और वह १२ ज्योतिा\लगों में एक है। यहां दूर दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। घुले के अनुसार गर्भगृह में महिला निषेध की सदियों पुरानी पंरपरा है और इसे हाल में लागू नहीं किया गया। यह प्रतिबंध पेशवा काल से ही है। परंपरा के अनुसार केवल पुरुषों को ही सुबह छह और सात बजे के बीच विशेष परिधान पहनने पर उस क्षेत्र में जाने दिया जाता था जहां मुख्य िंलग ाqस्थत है । महिलाएं मूल क्षेत्र वेâ बाहर से दर्शन कर सकती हैं।