जाट आंदोलन के दौरान बलात्कार पर बंटा हरियाणा


चंडीगढ़. मुर्थल में कथित तौर पर २२ फरवरी को महिलाओं के साथ हुए बलात्कार की घटना ने हरियाणा को जाटों और गैर जाटों में बाँट दिया है. २२ फरवरी की रात मुर्थल में कथित रूप से ३०-४० प्रदर्शनकारी जाटों के समूह ने जीटी रोड से गाड़ी को अगवा करके उसमें बैैठी महिलाओं के साथ साममूहिक बलात्कार किया. यह आरोप भी लगा कि पीड़ित महिलाओं को स्थानीय पुलिस ने कानूनी पचड़े से बचने की सलाह देकर मामला दर्ज नहीं किया. जमीनी हकीकत की पड़ताल करने के बाद यह समझा जा सकता है कि पुलिस ने दंगों के दौरान पूरी तरह से आंखे मूंदे ली.
रोहतक और गोहाना में नष्ट की गई ९० फीसदी संपत्ति गैर जाटों की थी यह मुख्य रूप से सैनी, पंजाबी और दलितों की थी. यह पूरा दंगा गैर जाटों की संपत्ति को नष्ट करने की मुहिम पर जा पहुंचा. चौंकाने वाला पहलू यह भी रहा कि केवल शहरी इलाकों में दंगा हुआ और दंगाई गांव से आए. वह एक अफवाह पर इकट्ठा हुए या फिर एक वैसे काम के लिए जिसमें सबकी मंजूरी थी. हरियाणा में जाट और सैनी समुदायों के पास जमीन है और इसे लेकर दोनों के बीच विवाद भी है. इसके अलावा जाटों और दलितों के बीच भी करीब डेढ़ दशक से जंग चली आ रही है जब वाल्मीकि समुदाय के कुछ लोगों ने कथित तौर पर एक जाट युवा की हत्या कर दी और फिर इसके बाद कई दलितों के घर जला दिए गए.
स्थानीय लोगों की माने तो मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री बनने को लेकर जाट सहज नहीं है. खट्टर पंजाबी समुदाय के हैं और उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद पंजाबी समुदाय ने कथित तौर पर जाटों पर तंज कसा. पूरे इलाके में यह बात किसी से छिपी नहीं है कि एक गैर जाट के मुख्यमंत्री बनने को लेकर जाट खुश नहीं हैं. कहा जाता है कि जाट आंदोलनकारी उस वक्त भड़क गए जब उन्होंने आंदोलन के दौरान एक भीड़ को यह कहते हुए सुना ‘मुख्यमंत्री साहब मत घबराना, ३५ बिरादरी आपके साथ है.’ इसके बाद अफवाहों का दौर चला जिसमें यह कहा गया कि जाट युवाओं को पीटा जा रहा है. इसीलिये उन्होंने चुन चुनकर गैर जाट प्रॉपर्टीज को निशाना बनाना शुरू कर दिया. दंगाइयों ने न केवल स्वूâलों को निशाना बनाया बाqल्क निजी अस्पतालों के आईसीयू में तोड़ फोड़ की. लेकिन बलात्कार की घटना ने जाटों की छवि को पर्याप्त नुक्सान पहुँचाया है, खट्टर को भी इस घटना से बहुत नुकसान पहुंचा है.