जम्मू कश्मीर सरकार गठन : पीडीपी-भाजपा के लिए 9 अप्रैल डेडलाइन


श्रीनगर।जम्मू और कश्मीर में नई सरकार के गठन के लिए मौजूदा विधानसभा को विघटन से बचने के लिए ९ अप्रैल तक बैठक बुलानी होगी। राज्य विधानसभा इस समय निलंबित अवस्था में है। पीडीपी और भाजपा के बीच मतभेद सुलझाने का समय तेजी से बीत रहा है। हालांकि पी.डी.पी के शीर्ष नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद के जनवरी में निधन के बाद से ही राज्य में गवर्नर रूल लगा हुआ है। राज्य विधानसभा की आखिरी बैठक १० अक्टूबर, २०१५ को हुई थी और जम्मू और कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद ५३ के मुताबिक विधानसभा के दो लगातार सत्रों के बीच छह महीने से ज्यादा का अंतराल नहीं हो सकता है और यह शर्त इस समय जारी सियासी बातचीत की डेडलाइन तय करती है। मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के कुछ संदेशों के बावजूद भाजपा से बातचीत का अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। दोनों ही पक्ष यह इशारा करते हुए दिख रहे हैं मानो उन पर सहयोगी दल दबाव डाल रहा हो।
महबूबा के करीबी सूत्रों का कहना है कि उनकी नेता मुफ्ती की ख्वाहिशों के मद्देनजर सरकार बनाने के लिए तैयार हैं और घाटी और जम्मू के मतभेदों को कम करना चाहती हैं। लेकिन पी.डी.पी. के लिए कश्मीरी भावनाओं को भरोसा दिलाने की जरूरत जैसे दूसरे पहलू भी हैं । दूसरी तरफ, भाजपा नेताओं का दावा है कि महबूबा के मन में क्या है यह वह इसे जाहिर नहीं करती हैं। वे दलील देते हैं कि मुफ्ती मोहम्मद सईद जम्मू के प्रतिनिधित्व के बिना किसी सरकार की साख नहीं होगी। इस बात को वे समझते थे और उनके उत्तराधिकारी को भी इसका ख्याल रखना चाहिए। जब तक कि दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंच जाते हैं और समझौता नहीं कर लेते हैं, कोई रास्ता निकलने की सूरत खत्म होती दिख रही है क्योंकि राज्यपाल शासन का समय बढ़ाया जा सकता है। अगर ऐसा नहीं हो पाया तो अप्रैल में विधानसभा भंग हो जाएगी और फिर चुनावों का ही विकल्प रह जाएगा। जाहिर है दोनों ही पक्ष इस मोड़ पर पहुंचने से बचना चाहेंगे