चीन की फर्मों को दी गई मंजूरी पर फिर से विचार कर रहा भारत


नई दिल्ली । भारतीय सुरक्षा तंत्र चीन की फर्मों को र्आिथक उदारीकरण नीतियों के तहत दी गई मंजूरी पर दोबारा गौर कर रहा है। हाल ही में चीन ने भारत का जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर को यूएन द्वारा बैन किए जाने के प्रस्ताव पर वीटो लगाने के प्रस्ताव पर साथ नहीं दिया। यही कारण है कि चीन को लेकर नीतियों पर पुर्निवचार किया जा रहा है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि चीन की फर्मों को जो सुरक्षा मंजूरियां हाल में दी जा रही थीं उनकी दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए। चीन ने पठानकोट हमले के सूत्रधार मसूद अजहर को आतंकवादियों की सूची में शामिल करने की भारत की मांग पर भारत का साथ नहीं दिया। चीनी रोक के बाद संयुक्त राष्ट्र में उसके स्थाई प्रतिनिधि लियु जीयी ने बीिंजग के दावे को दोहराते हुए कहा कि पाकिस्तान ाqस्थत जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) का प्रमुख मसूद अजहर आतंकवादी की श्रेणी में नहीं आता।
हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब चीन ने पाकिस्तान ाqस्थत आतंकी संगठन और उसके सरगना पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा बैन लगाए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया हो। यूएन ने २००१ में जैश-ए-मोहम्मद पर बैन लगाया था लेकिन भारत की ओर से २००८ के मुंबई हमलों के बाद अजहर पर बैन लगवाने की कोशिशों का चीन ने विरोध किया था। १५ सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के ५ स्थाई सदस्यों में चीन शामिल है और उसे वीटो पावर हासिल है। पिछले साल जुलाई में भी चीन ने पाकिस्तान की ओर से जकी-उर-रहमान लखवी को रिहा किए जाने के पैâसले के खिलाफ भारत के प्रस्ताव का विरोध किया था।
पिछले २ सालों में चीन की करीब २५ कम्पनियों को भारत ने सुरक्षा मंजूरी दी है। यह मंजूरियां पावर रेलवे और टैलीकॉम सैक्टरों में दी गई हैं। मेक इन इंडिया को सफल बनाने के लिए गृह मंत्रालय ने भी चीन की कई ऐसी फर्मों को भारत में कारोबार करने की मंजूरी दे दी थी जिन्हें पहले नहीं दी जाती थी। सरकारी आकड़ों के मुताबिक २०१५ में १७४४ प्राजैक्टों को मंजूरी दी गई, जबकि २०१४ में सिर्पâ ८१५ को और २०१३ में ७१२ को।