गेट्स फाउंडेशन पर नजर


नई दिल्ली । भारत सरकार बारीकी से बिल एंड मेिंलडा गेट्स फाउंडेशन भारत में दान के तरीकों की जांच कर रही है। वेंâद्र सरकार ने यह कदम एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के बाद उठाया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि दुनिया की सबसे बड़ी परोपकारी संस्था बहुराष्ट्रीय दवा वंâपनियों के पक्ष में सरकार की नीतियों को प्रभावित कर रही है। अन्य अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं के उलट फॉरेन कॉन्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट के तहत पंजीकृत नहीं है। इसके चलते फाउंडेशन की ओर से दी जाने वाली राशि गृह मंत्रालय की जांच के दायरे के बाहर है। गौरतलब है कि गृह मंत्रालय एनजीओ और उनसे धन हासिल करने वाले संगठनों के लिए नियमक प्राधिकरण का काम करता है। गेट्स फाउंडेशन फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (पेâमा) के तहत ‘लायजन ऑफिस’ (संपर्वâ कार्यालय) के रूप में काम करता है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक से स्वीकृति मिली है। पिछले साल जून में मोदी सरकार ने विदेशी सहायता पाने वाले एनजीओ पर कार्रवाई करते हुए १० हजार से अधिक संगठनों के लाइसेंस निरस्त किए थे।विशेषज्ञों का कहना है कि गेट्स फाउंडेशन को इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ा था क्योंकि यह एफसीआरए के तहत पंजीकृत नहीं है, जो कि अपने आप में कानून का उल्लंघन है।
गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमने अभी तक किसी कार्रवाई के बारे में नहीं सोचा है, लेकिन नियमों का पालन करने के लिए बाध्य है और उसे के तहत पंजीकरण कराना होगा। अधिकारी ने बताया कि गेट्स फाउंडेशन अभी के तहत पंजीकृत नहीं है, इसलिए एनजीओ की पंâिंडग सरकार की निगरानी सूची में नहीं आती है। उन्होंने बताया कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि फाउंडेशन कहां और वैâसे पंâिंडग कर रहा है। साथ ही यह भी कहा कि यह एक लूपहोल है और यह अन्य एनजीओ के लिए भी बचाव का रास्ता खोल सकता है, जिससे वे भी सरकार की निगरानी से बच सवेंâ। अधिकारी ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक भारत में काम करने के लिए ‘लायजन ऑफिस’ की इजाजत देती है और वेंâद्रीय बैंक अपनी इस शव्âित को नहीं छोड़ना चाहती है। इस कदम का दुरुपयोग कई विदेशी संगठनों के द्वारा विदेशी पंâड को बिना जांच के भारत भेजने के लिए किया जाता है।